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Google AI: छोटे कारोबारियों को लोन दिलाने में मदद करेगा Google, किसानों और शिक्षकों के लिए भी बड़ा प्लान

 

Google AI: Google ने भारत में छोटे कारोबारियों, किसानों और शिक्षकों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहल की घोषणा की है। कंपनी छोटे कारोबारियों को कर्ज और नए बाजारों तक पहुंच दिलाने, किसानों को खेती से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने और शिक्षकों को AI की ट्रेनिंग देने पर काम कर रही है। इसके लिए Google.org ने भारतीय MSME सेक्टर को सहयोग देने के लिए 1.5 करोड़ डॉलर की फंडिंग का एलान किया है। इन पहलों का मकसद AI तकनीक को रोजमर्रा की जरूरतों से जोड़ना है।

छोटे कारोबारियों के लिए 1.5 करोड़ डॉलर की फंडिंग

भारत में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम यानी MSME सेक्टर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का बड़ा आधार है। Google के अनुसार, देश में 9 करोड़ से अधिक MSME हैं, जो 34.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देते हैं। इसके बावजूद छोटे कारोबारियों को औपचारिक कर्ज लेने, नए ग्राहक तलाशने और सरकारी नियमों का पालन करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

इन समस्याओं को दूर करने के लिए Google.org, The/Nudge को 15 मिलियन डॉलर यानी 1.5 करोड़ डॉलर की फंडिंग देगा। भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 135 करोड़ रुपये बैठती है, हालांकि वास्तविक रुपये की राशि विनिमय दर के अनुसार बदल सकती है।

इस फंडिंग के जरिए ऐसे AI टूल विकसित किए जाएंगे, जो छोटे कारोबारियों को औपचारिक वित्तीय संस्थानों से कर्ज हासिल करने, नए बाजारों की पहचान करने और जरूरी नियमों का पालन करने में मदद कर सकें।

योजना के तहत नए समाधान विकसित करने के लिए प्रस्ताव भी आमंत्रित किए जाएंगे। इसके अलावा, छोटे शहरों में युवाओं को रोजगार के लिए जरूरी कौशल सिखाने और उन्हें स्थानीय कारोबारों से जोड़ने के लिए बहुभाषी, वॉइस आधारित प्लेटफॉर्म तैयार करने की योजना है।

किसानों को AI से मिलेगी फसल और मौसम की जानकारी

Google खेती-किसानी में भी AI तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रहा है। कंपनी के Agricultural Understanding मॉडल फसल की स्थिति, मिट्टी की सेहत, कीटों और बीमारियों के खतरे तथा मौसम से जुड़े रुझानों की जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।

गुजरात में Amnex ने Google के कृषि AI मॉडल को राज्य सरकार के Krushi Pragati क्रॉप इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म से जोड़ा है। Google के मुताबिक, इस व्यवस्था के जरिए पिछले एक साल में 6 लाख से ज्यादा किसानों को 90 करोड़ से अधिक SMS आधारित कृषि सलाह भेजी गईं।

इन संदेशों में खेती से जुड़े विभिन्न विषयों पर जानकारी दी जाती है, जिससे किसानों को फसल प्रबंधन और कृषि संबंधी फैसले लेने में सहायता मिल सकती है। कंपनी के अनुसार, इस व्यवस्था से 1.4 करोड़ हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर खेती से जुड़े फैसलों में मदद मिल रही है।

Google अपने कृषि AI मॉडल को पब्लिक प्रीव्यू में भी उपलब्ध करा रहा है। इससे डेवलपर्स, स्टार्टअप और शोधकर्ता इनका इस्तेमाल करके अलग-अलग क्षेत्रों और स्थानीय जरूरतों के अनुसार कृषि समाधान तैयार कर सकेंगे।

इसके अलावा, OpenAgriNet कृषि से जुड़ी अलग-अलग जगहों पर उपलब्ध जानकारी को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को उनकी भाषा में उपयोगी जानकारी मिल सके।

AI से जलवायु के अनुकूल फसल विकसित करने की तैयारी

Google DeepMind और Google.org ने कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में भी साझेदारी की है। इसके तहत हैदराबाद स्थित International Crops Research Institute for the Semi-Arid Tropics (ICRISAT), HudsonAlpha Institute for Biotechnology और University of Washington के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर ज्वार की बेहतर और जलवायु के अनुकूल किस्मों के विकास में AI का इस्तेमाल किया जाएगा।

इस परियोजना में 90 से अधिक देशों से एकत्र ज्वार के 44,000 से ज्यादा बीजों के संग्रह का इस्तेमाल किया जाएगा। शोधकर्ता आनुवंशिक विश्लेषण और मशीन लर्निंग की मदद से ऐसी किस्मों की पहचान करने की कोशिश करेंगे, जो बदलती जलवायु के बीच बेहतर उत्पादन और मजबूती दिखा सकें।

इस परियोजना से तैयार होने वाला आनुवंशिक कैटलॉग सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने की योजना है। इसका लाभ दुनिया भर के शोधकर्ताओं और फसल प्रजनन विशेषज्ञों को मिल सकता है। Google DeepMind इस क्षेत्र में शोध को आगे बढ़ाने के लिए ICRISAT में तीन साल की पोस्टडॉक्टोरल फेलोशिप को भी सहयोग देगा।

80 हजार से ज्यादा शिक्षकों को मिली AI ट्रेनिंग

शिक्षा के क्षेत्र में Google ने AI आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। कंपनी ने मई 2026 में भारत में Google AI Educator Series की शुरुआत की थी। इसके तहत शिक्षकों को Gemini और NotebookLM जैसे AI टूल का इस्तेमाल करना सिखाया जा रहा है।

इन टूल की मदद से शिक्षक पाठ योजनाएं तैयार करने, विद्यार्थियों की जरूरत के हिसाब से अध्ययन सामग्री बनाने और पढ़ाने से पहले की तैयारी में लगने वाला समय कम करने की कोशिश कर सकते हैं।

Google के अनुसार, मई से अब तक देशभर में 80 हजार से अधिक शिक्षकों को इस कार्यक्रम के तहत ट्रेनिंग दी जा चुकी है। अब बिहार, मध्य प्रदेश और सिक्किम के साथ-साथ कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के सहयोग से इस पहल का विस्तार किया जाएगा।

कंपनी ने शिक्षकों के लिए मुफ्त, अपनी गति से पूरा किया जा सकने वाला ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू करने की घोषणा की है। यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार किया गया है। फिलहाल यह अंग्रेजी में उपलब्ध है और हिंदी समेत अन्य भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध कराने की योजना है।

Google, IIT बॉम्बे और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय जैसे संस्थानों के साथ मिलकर शिक्षा में AI के व्यावहारिक इस्तेमाल और शोध को आगे बढ़ाने पर भी काम कर रहा है।

छोटे कारोबार, खेती और शिक्षा पर क्यों है Google का जोर?

Google की नई पहलों से साफ है कि कंपनी AI का इस्तेमाल केवल चैटबॉट या डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं रखना चाहती। छोटे कारोबारियों के लिए वित्तीय और बाजार संबंधी मदद, किसानों के लिए उपयोगी कृषि जानकारी और शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण इसके प्रमुख क्षेत्र हैं।

हालांकि, इन पहलों का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि AI आधारित सेवाएं कितनी आसानी से लोगों तक पहुंचती हैं और उनसे कारोबार, खेती की उत्पादकता तथा शिक्षा की गुणवत्ता में कितना सुधार होता है।