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GST 2.0 में कारोबारियों को बड़ी राहत! रजिस्ट्रेशन से रिफंड तक आसान होगी प्रक्रिया, जानें क्या बदलेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने GST सुधारों के अगले चरण को लेकर कहा है कि इससे कारोबारियों के लिए अनुपालन आसान और रिफंड प्रक्रिया तेज होगी। 7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक में रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, ITC और विवाद निपटान से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा हो सकती है।
 

GST 2.0 Reforms: जीएसटी सुधारों का अगला चरण कारोबारियों और टैक्सपेयर्स के लिए अनुपालन प्रक्रिया को आसान बनाने पर केंद्रित होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि Next-Gen GST सुधारों से रजिस्ट्रेशन, रिटर्न दाखिल करने और रिफंड जैसी प्रक्रियाएं सरल और तेज होंगी। इससे कारोबारियों की लागत और अनुपालन का बोझ कम करने की कोशिश की जाएगी।

जीएसटी काउंसिल की 7 अक्टूबर 2026 को होने वाली बैठक से पहले सरकार ने सुधारों के अगले चरण की रूपरेखा सामने रखी है। इसमें टैक्स प्रशासन को अधिक सरल, पारदर्शी और अनुमानित बनाने पर जोर है।

GST 2.0 में क्या बदलने की तैयारी?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, जीएसटी सुधारों के अगले चरण में मुख्य रूप से रजिस्ट्रेशन, रिटर्न फाइलिंग, रिफंड, विवाद निपटान और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर फोकस रहेगा।

सरकार का उद्देश्य यह है कि कारोबारियों को टैक्स अनुपालन में कम समय और कम लागत लगे। खासकर छोटे कारोबारियों और MSME के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

रिफंड प्रक्रिया होगी आसान और तेज

GST 2.0 के प्रस्तावित बदलावों में रिफंड प्रक्रिया को अधिक स्वचालित और तेज बनाने पर भी जोर है। निर्यातकों के लिए तेजी से रिफंड जारी करने और कारोबारी पूंजी को जल्द वापस उपलब्ध कराने से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार किया जा रहा है।

इसका सीधा असर कारोबारियों की वर्किंग कैपिटल पर पड़ सकता है। रिफंड में लगने वाला समय कम होने से कारोबार में फंसी रकम जल्द वापस आने की उम्मीद है।

ITC और टैक्स क्रेडिट की प्रक्रिया भी होगी सरल

इनपुट टैक्स क्रेडिट GST व्यवस्था का अहम हिस्सा है। प्रस्तावित सुधारों में ITC से जुड़ी प्रक्रिया को आसान और अधिक स्पष्ट बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य ऐसे मामलों में अनावश्यक विवाद कम करना है, जहां वास्तविक कारोबारी लेनदेन होने के बावजूद तकनीकी या प्रक्रियात्मक कारणों से टैक्स क्रेडिट अटक जाता है।

छोटे कारोबारियों और ई-कॉमर्स सेलर्स को राहत

GST सुधारों के अगले चरण में छोटे ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए भी अनुपालन आसान करने का प्रस्ताव है। मौजूदा व्यवस्था में अलग-अलग राज्यों में कारोबार करने वाले छोटे विक्रेताओं के सामने रजिस्ट्रेशन से जुड़ी अतिरिक्त प्रक्रिया आती है।

प्रस्तावित व्यवस्था में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़े छोटे विक्रेताओं के लिए सत्यापित पते के आधार पर प्रक्रिया आसान करने पर विचार किया जा रहा है। इससे छोटे ऑनलाइन कारोबारियों का अनुपालन बोझ कम हो सकता है।

GST अपराधों के प्रावधानों में भी बदलाव संभव

GST 2.0 का अगला चरण केवल रजिस्ट्रेशन और रिफंड तक सीमित नहीं है। GST कानून में कुछ अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने और अभियोजन की सीमा बढ़ाने जैसे प्रस्ताव भी चर्चा में हैं।

सूत्रों के मुताबिक, गंभीर मामलों को छोड़कर छोटी या तकनीकी गलतियों पर आपराधिक कार्रवाई के बजाय वित्तीय दंड और सुधारात्मक व्यवस्था को प्राथमिकता देने की दिशा में बदलाव हो सकता है। गिरफ्तारी से जुड़े मौजूदा प्रावधानों को हटाने का प्रस्ताव भी विचाराधीन बताया गया है।

सरकार का दावा- बढ़ा GST अनुपालन

सरकार का कहना है कि GST दरों के सितंबर 2025 में किए गए युक्तिकरण के बाद कर संग्रह और कर योग्य आपूर्ति में वृद्धि हुई है। वित्त मंत्रालय की ओर से बताए गए आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-सितंबर 2026 के दौरान सकल GST संग्रह 12.46 लाख करोड़ रुपये रहा, जो सालाना आधार पर 11.6 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में रिफंड करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये रहा।

7 अक्टूबर को GST Council की बैठक में होगी चर्चा

GST सुधारों का अगला चरण अब GST Council की बैठक के एजेंडे में है। 7 अक्टूबर की बैठक में रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, ITC, विवाद निपटान और टैक्स अनुपालन से जुड़े कई प्रक्रियात्मक बदलावों पर चर्चा हो सकती है। इन प्रस्तावों का अंतिम स्वरूप GST Council के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल सरकार का फोकस कम अनुपालन बोझ, तेज रिफंड और अधिक सरल टैक्स व्यवस्था बनाने पर है।