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राहुल गांधी ने संसद में लगाया एपस्टीन से मिलने का आरोप तो हरदीप पुरी ने किया पलटवार, बोले- मैं 3-4 बार मिला था...

 
नई दिल्ली। लोकसभा में बजट सत्र के दौरान बुधवार को ‘एपस्टीन फाइल्स’ का मुद्दा उठते ही राजनीतिक माहौल गरमा गया। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान के बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोपों को बेबुनियाद करार दिया।

क्या बोले हरदीप सिंह पुरी?

केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने कहा कि राहुल गांधी को यह समझना चाहिए कि ‘एपस्टीन फाइल्स’ गंभीर आपराधिक मामलों और यौन शोषण से जुड़े आरोपों से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि जेफरी एपस्टीन पर एक निजी द्वीप पर लोगों को ले जाकर यौन शोषण करने और बाल यौन अपराधों के आरोप लगे थे, जिनके पीड़ितों ने कानूनी कार्रवाई भी की है।

पुरी ने स्पष्ट किया कि उनकी बातचीत या मुलाकात का इन आरोपों से कोई संबंध नहीं है।

एपस्टीन से मुलाकात पर दी सफाई

हरदीप पुरी ने स्वीकार किया कि उनकी मुलाकात जेफरी एपस्टीन से हुई थी, लेकिन यह मुलाकात साल 2009 में उस समय हुई जब वे अमेरिका में भारत के राजदूत थे। उन्होंने बताया कि यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय पीस इंस्टिट्यूट (IPI) के एक प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के तौर पर हुई थी।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में सारी जानकारी सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है और करीब 30 लाख ईमेल सार्वजनिक रिकॉर्ड में हैं। पुरी ने यह भी कहा कि मंत्री बनने से कई साल पहले की ये औपचारिक मुलाकातें थीं और उनका किसी भी अवैध गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है।

राहुल गांधी ने क्या आरोप लगाए?

संसद में बोलते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि उद्योगपति अनिल अंबानी का नाम ‘एपस्टीन फाइल्स’ में होने के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी कहा कि हरदीप पुरी जानते हैं कि अनिल अंबानी की मुलाकात एपस्टीन से किसने करवाई।

सदन के बाहर राहुल गांधी ने कहा कि अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट के पास मौजूद फाइलों में हरदीप पुरी और अनिल अंबानी के नाम शामिल हैं।

‘बेबुनियाद आरोप लगाने की आदत’

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए हरदीप पुरी ने कहा कि राहुल गांधी को बिना आधार के आरोप लगाने की आदत है। उन्होंने बताया कि नवंबर 2014 में वे एक आम नागरिक थे और उस दौरान एक संपर्क के जरिए उनकी मुलाकात लिंक्डइन के संस्थापक रीड हॉफमैन से अमेरिका के वेस्ट कोस्ट में करवाई गई थी।

पुरी ने कहा कि उन्होंने अपने ईमेल में भारत को निवेश और अवसरों के लिहाज से उभरता हुआ देश बताया था और रीड हॉफमैन को भारत आकर बदलाव देखने का निमंत्रण दिया था।