{"vars":{"id": "130921:5012"}}

दवा की कीमत में कितना मुनाफा? खरीद दर से बिक्री कीमत तक सब देख सकेंगे ऑनलाइन

 

लखनऊ: अस्पताल की फार्मेसी से दवा खरीदने वाले मरीजों के लिए बड़ी खबर है। अब वे यह जान सकेंगे कि फार्मेसी ने संबंधित दवा कितने रुपये में खरीदी और उसे मरीज को कितने में बेचा जा रहा है। अस्पतालों की फार्मेसियों में दवाओं की खरीद और बिक्री कीमत के बीच बड़े अंतर की शिकायतों के बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने इस संबंध में नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए हैं।

नई व्यवस्था के तहत खुदरा दवा विक्रेताओं और अस्पताल परिसर में संचालित फार्मेसियों को अपनी वेबसाइट बनानी होगी। यह वेबसाइट आम लोगों के लिए खुली रहेगी। इसमें फार्मेसी से जुड़ी जरूरी जानकारियों के साथ लाइसेंस, फार्मासिस्ट और दवाओं के स्टॉक का विवरण भी सार्वजनिक करना होगा।

खरीद और बिक्री कीमत बताना होगा जरूरी

खास तौर पर उन अस्पतालों में संचालित फार्मेसियों को दवाओं की खरीद और बिक्री कीमत वेबसाइट पर बतानी होगी, जहां मरीजों के पास दवा, चिकित्सा उपकरण या पोषण संबंधी उत्पाद खरीदने का दूसरा विकल्प उपलब्ध नहीं है।

ऐसी फार्मेसियों को वेबसाइट पर दवा का निर्माता, ब्रांड नाम, जेनेरिक नाम, अस्पताल के लिए खरीद दर और उपभोक्ता को बेची जाने वाली कीमत की जानकारी देनी होगी। इसका उद्देश्य फार्मेसियों को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि मरीजों के हित में जरूरी जानकारी को पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करना है।

लाइसेंस और फार्मासिस्ट की जानकारी भी होगी ऑनलाइन

एफएसडीए की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की ओर से जारी आदेश में औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO)-2013 के प्रस्तर 25 का हवाला दिया गया है। इसमें प्रावधान है कि खुदरा दुकानदार और डीलर को निर्माता या आयातक से मिली मूल्य सूची ऐसी जगह प्रदर्शित करनी चाहिए, जहां कोई भी व्यक्ति उसे आसानी से देख सके।

विभाग के मुताबिक, कई फर्म इस प्रावधान का पालन नहीं कर रही हैं। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में दवा निर्माता, मार्केटिंग फर्म और स्टॉकिस्ट अस्पतालों में संचालित फार्मेसियों को ऊंची कीमत पर दवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इसी के बाद अस्पताल की फार्मेसियों में दवाओं की खरीद और बिक्री कीमत को सार्वजनिक करने की व्यवस्था की गई है।

वेबसाइट पर फार्मेसी का नाम, लाइसेंस नंबर, लाइसेंस धारक का नाम और लाइसेंस प्राप्त परिसर का पता भी देना होगा। इसके अलावा अस्पताल या फार्मेसी में नियुक्त फार्मासिस्ट का नाम, पंजीकरण संख्या और फोटो वेबसाइट के मुख्य पेज पर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।

हर सप्ताह अपडेट करना होगा दवाओं का स्टॉक

फार्मेसियों को अपने स्टॉक की जानकारी भी नियमित रूप से अपडेट करनी होगी। इसके लिए हर सप्ताह वेबसाइट पर उपलब्ध दवाओं के स्टॉक का विवरण जारी करना होगा।

ग्राहकों की सुविधा के लिए फार्मेसी काउंटर पर वेबसाइट का पता प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। इसके साथ ही एप या क्यूआर कोड के जरिए भी ग्राहकों को वेबसाइट तक पहुंच उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

इस व्यवस्था से मरीजों को दवाओं की कीमतों को लेकर अधिक पारदर्शिता मिलेगी और वे यह समझ सकेंगे कि अस्पताल की फार्मेसी में दवा किस कीमत पर खरीदी गई और उनसे कितनी कीमत ली जा रही है।