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ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका, पूर्व मंत्री ज्योति प्रिय मल्लिक ने सभी पद से दिया इस्तीफा 
 

 

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में अंदरूनी कलह लगातार बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं—पूर्व राज्य मंत्री ज्योति प्रिय मल्लिक और सिलीगुड़ी के मेयर गौतम देब ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा देकर सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। विधानसभा और लोकसभा चुनाव 2026 में भाजपा से मिली करारी शिकस्त के बाद टीएमसी में इस्तीफों और असंतोष का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।

ज्योति प्रिय मल्लिक ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पार्टी की वर्किंग कमेटी समेत सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों से उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है। उनका ब्लड शुगर स्तर असामान्य रूप से बढ़ गया है और वे किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। मल्लिक ने कहा कि ऐसी स्थिति में पार्टी की जिम्मेदारियां निभाना संभव नहीं है और जब काम नहीं कर सकते तो पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।

गौरतलब है कि हाल ही में ममता बनर्जी ने पार्टी में बड़े फेरबदल के दौरान ज्योति प्रिय मल्लिक को दोबारा वर्किंग कमेटी में शामिल किया था। मल्लिक टीएमसी के संस्थापक नेताओं में गिने जाते हैं और उत्तर 24 परगना जिले में पार्टी के सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल रहे हैं। वे पांच बार विधायक रह चुके हैं तथा 2011 से 2021 तक राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री और उसके बाद वन मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं।

अक्टूबर 2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित राशन वितरण घोटाले में उन्हें गिरफ्तार किया था। करीब 15 महीने जेल में रहने के बाद जनवरी 2025 में उन्हें जमानत मिली थी। हालांकि 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार देवदास मंडल ने हाबड़ा सीट पर उन्हें 31 हजार से अधिक मतों के अंतर से पराजित कर दिया था।

इधर, उत्तर बंगाल के कद्दावर टीएमसी नेता और सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर गौतम देब ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने निगम आयुक्त को इस्तीफा सौंपने के साथ ही सरकारी वाहन और सुरक्षा सुविधा भी लौटा दी।

टीएमसी में इस्तीफों का यह सिलसिला पहले से जारी है। इससे पहले कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम, बिधाननगर की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती तथा 17 जून को गोरखा टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के मुख्य कार्यकारी अनित थापा भी अपने पद छोड़ चुके हैं। लगातार हो रहे इन इस्तीफों को टीएमसी के 28 वर्षों के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा है।