{"vars":{"id": "130921:5012"}}

CJP छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामले में CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा- ‘बच्चा तो बच्चा ही है, सुरक्षा सुनिश्चित की जाए’

 

New Delhi : जुलाई में हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामले में 14 वर्षीय लड़की को कथित तौर पर धमकी दिए जाने और उसके घर पर पथराव के आरोपों को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले में उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

छात्र प्रदर्शन से संबंधित सुनवाई के दौरान एक वकील ने कोर्ट के सामने इस मामले को उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में एक व्यक्ति ने कुछ वीडियो में दावा किया कि उसने CJP के प्रदर्शन के दौरान लड़की के पिता पर हमला किया था। इस मामले में FIR दर्ज होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन अब लड़की को कथित तौर पर धमकियां मिल रही हैं।

स्वतंत्र भारद्वाज के दावे का किया गया जिक्र

सुनवाई के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज नाम के व्यक्ति के एक पॉडकास्ट में किए गए कथित दावे का जिक्र किया गया। आरोप है कि उन्होंने पॉडकास्ट में CJP कार्यकर्ता के पिता के साथ मारपीट करने की बात कही थी।

वकील के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने CJP के प्रदर्शन के बाद स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार किया और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।

वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि लड़की के घर पर कथित पथराव से संबंधित वीडियो मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि यदि बच्ची को किसी तरह का नुकसान पहुंचता है तो बाद में उसकी भरपाई संभव नहीं होगी।

‘पथराव में शामिल लोगों पर कार्रवाई नहीं’ का आरोप

वकील ने आरोप लगाया कि लड़की के घर पर पथराव करने वाले लोगों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसके उलट बच्ची और उसके परिवार के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने का भी दावा किया गया।

सुनवाई के दौरान यह आरोप भी लगाया गया कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान हमला करने वाले कुछ लोगों को बाद में चार पुलिसकर्मियों के साथ देखा गया था। वकील ने इसके समर्थन में वीडियो उपलब्ध होने की बात कही।

CJI ने कहा- ‘बच्चा तो बच्चा ही है’

इन आरोपों को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बच्ची की सुरक्षा को लेकर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि *“बच्चा तो बच्चा ही है”* और उसकी सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।

CJI ने कहा कि यदि असामाजिक तत्वों ने बच्ची के खिलाफ हिंसा की है और वे अभी भी खुले में घूम रहे हैं तथा उसे डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं, तो यह गंभीर मामला है।

UP और दिल्ली से मांगी रिपोर्ट

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि उन्हें सोशल मीडिया पर बच्ची की ओर से किए गए पोस्ट के माध्यम से मामले की जानकारी मिली है।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्ची की ओर से दर्ज FIR में कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही कोर्ट ने बच्ची और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश और दिल्ली से मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। अब अगली सुनवाई में दोनों राज्यों की ओर से की गई कार्रवाई और बच्ची की सुरक्षा से जुड़े कदमों की जानकारी कोर्ट के सामने रखी जाएगी।