चीन के साथ रिश्तों पर जयशंकर ने क्या कहा? 2020 की झड़प से 2024 के सुधार तक समझें पूरा मामला
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों पर कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता के बिना रिश्तों को सामान्य बनाना मुश्किल है। उन्होंने 2020 की गलवान झड़प के असर, दशकों पुराने सीमा विवाद और 2024 के बाद दोनों देशों के संबंधों में आए सुधार पर भी अपनी बात रखी।
नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना जरूरी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी तरह की गड़बड़ी का असर दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-चीन सीमा विवाद दशकों पुराना है, लेकिन 2020 में सीमा पर हुई झड़प ने दोनों देशों के रिश्तों को बड़ा झटका दिया था। जयशंकर के मुताबिक, 2024 के बाद से सीमा पर हालात में सुधार के साथ द्विपक्षीय संबंधों को भी आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
भारत-चीन सीमा विवाद दशकों पुराना
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों पर बात करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सीमा का प्रश्न नया नहीं है। यह विवाद कई दशकों से चला आ रहा है और सीमा का निर्धारण अब तक पूरी तरह नहीं हो पाया है।
जयशंकर ने कहा कि 1975 से 2020 के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर किसी सैनिक की मौत की घटना नहीं हुई थी। उनके अनुसार, सीमा पर लंबे समय तक शांति बनी रही और इस दौरान दोनों देशों के संबंधों में भी सुधार हुआ।
हालांकि, जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प ने इस स्थिति को बदल दिया। इस घटना में भारत और चीन, दोनों पक्षों के सैनिकों की जान गई थी।
2020 की झड़प से बिगड़े रिश्ते
जयशंकर ने कहा कि 2020 में जब भारत कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन की चुनौतियों से गुजर रहा था, उसी दौरान सीमा पर तनाव बढ़ गया। दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद द्विपक्षीय संबंधों पर गहरा असर पड़ा।
विदेश मंत्री के मुताबिक, सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने की बुनियादी शर्त है। जब सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव बढ़ता है, तो इसका असर व्यापार, कूटनीतिक संवाद और अन्य क्षेत्रों में सहयोग पर भी पड़ता है।
उन्होंने संकेत दिया कि सीमा पर पैदा हुए तनाव को कम करने और सामान्य स्थिति बहाल करने में दोनों देशों को लंबी बातचीत करनी पड़ी।
सीमा पर तनाव का असर पांच साल तक दिखा
जयशंकर ने कहा कि 2020 के घटनाक्रम ने भारत-चीन संबंधों की दिशा बदल दी थी। सीमा पर शांति भंग होने के परिणाम दोनों देशों के रिश्तों में स्पष्ट रूप से दिखाई दिए।
उन्होंने बताया कि सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत और समाधान की प्रक्रिया में कई साल लगे। भारत का रुख स्पष्ट है कि सीमा पर स्थिरता के बिना व्यापक संबंधों को सामान्य तरीके से आगे बढ़ाना मुश्किल होगा।
विदेश मंत्री के बयान का मुख्य संदेश यह है कि सीमा विवाद को केवल सैन्य या क्षेत्रीय मुद्दे के रूप में नहीं देखा जा सकता। इसका सीधा संबंध दोनों देशों के राजनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों से भी है।
2024 के बाद संबंधों में सुधार के संकेत
चीन के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि भारत चाहता है कि सीमा पर स्थिरता बनी रहे और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति कायम हो। इसके बाद ही दोनों देश अपने संबंधों के दूसरे पहलुओं पर आगे बढ़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि 2024 के बाद सीमा पर परिस्थितियों में सुधार हुआ है और इसके साथ ही भारत-चीन संबंधों को भी सामान्य बनाने की दिशा में प्रगति हुई है।
भारत और चीन के बीच अक्टूबर 2024 में पूर्वी लद्दाख के वास्तविक नियंत्रण रेखा वाले क्षेत्रों में गश्त और सैनिकों की वापसी से जुड़े समझौते की घोषणा हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क और संवाद को आगे बढ़ाने के प्रयास भी हुए।
हालांकि, सीमा विवाद का पूरी तरह समाधान होना और द्विपक्षीय संबंधों का सामान्य होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करना और सीमा पर स्थायी शांति बनाए रखना अभी भी महत्वपूर्ण चुनौती है।
भारत का स्पष्ट संदेश: सीमा पर शांति जरूरी
जयशंकर के बयान से स्पष्ट है कि भारत चीन के साथ संबंध सुधारने के लिए तैयार है, लेकिन सीमा पर शांति और स्थिरता को इसकी अहम शर्त मानता है।
विदेश मंत्री ने जोर दिया कि यदि दोनों देश व्यापक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो सीमावर्ती क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बनाए रखना जरूरी होगा। सीमा पर किसी भी तरह का तनाव दोनों देशों के बीच सहयोग की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
भारत-चीन संबंधों का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों देश सीमा से जुड़े लंबित मुद्दों को बातचीत के जरिए किस हद तक सुलझा पाते हैं और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बनाए रखने के लिए कितने प्रभावी कदम उठाते हैं।