{"vars":{"id": "130921:5012"}}

चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा फैसला, 10 लाख टन Raw Sugar बिना ड्यूटी आएगी भारत

भारत सरकार ने बढ़ती घरेलू कीमतों पर लगाम लगाने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है। आयात 31 अक्टूबर तक होगा। त्योहारी सीजन से पहले चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।
 

नई दिल्ली: देश में चीनी की लगातार बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी (Raw Sugar) के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह आयात 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और आगामी त्योहारी सीजन से पहले कीमतों को नियंत्रित करना है।

भारत में पिछले दो महीनों के दौरान चीनी की कीमतों में करीब 40 फीसदी तक की तेजी आई है। घरेलू उत्पादन में कमी के चलते बाजार में उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में सरकार ने करीब एक दशक बाद कच्ची चीनी के आयात का रास्ता खोला है।

त्योहारी सीजन से पहले बढ़ेगी चीनी की उपलब्धता

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में अगस्त से नवंबर के बीच त्योहारी सीजन के कारण चीनी की मांग बढ़ जाती है। गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की खपत बढ़ने से कीमतों पर और दबाव पड़ने की आशंका थी।

ड्यूटी-फ्री आयात से घरेलू बाजार में अतिरिक्त चीनी पहुंचने की उम्मीद है, जिससे आपूर्ति की स्थिति बेहतर हो सकती है और कीमतों में तेजी पर रोक लग सकती है।

करीब 10 साल बाद चीनी आयात का फैसला

भारत ने करीब एक दशक बाद कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है। इससे पहले देश ने 2016-17 के चीनी सीजन में कच्ची चीनी का आयात किया था। इस बार घरेलू उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक पर दबाव को देखते हुए सरकार ने आयात का फैसला किया है।

भारत में आम तौर पर चीनी के आयात पर 100 फीसदी शुल्क लगाया जाता है। शुल्क हटाए जाने से आयातकों के लिए विदेश से कच्ची चीनी लाना अधिक आकर्षक हो जाएगा।

चीनी की कीमतों में क्यों आया उछाल?

घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेजी का प्रमुख कारण उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक के बीच बढ़ता अंतर माना जा रहा है। 2025-26 चीनी सीजन में उत्पादन करीब 28 मिलियन टन रहा, जबकि घरेलू खपत का अनुमान लगभग 28-28.5 मिलियन टन सालाना है। इसके अलावा चीनी का कुछ हिस्सा एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हुआ और इस सीजन में निर्यात भी हुआ। इससे घरेलू बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।

सरकार ने स्टॉक रखने के नियम भी किए सख्त

चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने हाल में थोक उपभोक्ताओं के लिए स्टॉक रखने की अवधि भी कम कर दी है। एक सितंबर से 30 नवंबर तक महीने में 10 टन से अधिक चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक उपभोक्ता 15 दिन से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकेंगे। इनमें कन्फेक्शनरी निर्माता, सॉफ्ट ड्रिंक कंपनियां, फूड प्रोसेसिंग इकाइयां और मिठाई विक्रेता शामिल हैं।

सरकार का मानना है कि इन कदमों से बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ेगी और जमाखोरी तथा कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों पर रोक लगेगी।

वैश्विक बाजार पर भी दिखा असर

भारत के आयात फैसले का असर अंतरराष्ट्रीय चीनी बाजार पर भी दिखाई दिया। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उपभोक्ता है, इसलिए उसके आयात बढ़ाने के फैसले से लंदन और न्यूयॉर्क के वैश्विक चीनी बेंचमार्क पर भी तेजी देखने को मिली। सरकार की कोशिश अब घरेलू बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की है, ताकि त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने के बावजूद चीनी की कीमतों में अनियंत्रित बढ़ोतरी न हो।