अफ्रीका में चीन को टक्कर दे रहा भारत! पांच महीने में निर्यात 47% बढ़ा, जानें किन देशों में सबसे ज्यादा मांग
भारत का निर्यात अब अफ्रीका और आसियान देशों में तेजी से बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों में अफ्रीका को निर्यात 47 प्रतिशत और आसियान देशों को 56 प्रतिशत बढ़ा। दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया और मिस्र में भारतीय सामान की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
नई दिल्ली: भारत के वस्तु निर्यात का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिका और यूरोप पर निर्भरता के बीच अब भारतीय निर्यातकों की पहुंच अफ्रीका और आसियान देशों तक मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती महीनों में अफ्रीकी देशों को भारत के निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया और मिस्र जैसे बाजारों में भारतीय वस्तुओं की मांग बढ़ रही है, जहां अब तक चीन का मजबूत दबदबा रहा है।
अफ्रीका में भारत के निर्यात में 47 प्रतिशत की बढ़ोतरी
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल से अगस्त के दौरान भारत ने अफ्रीकी देशों को 26.19 अरब डॉलर का निर्यात किया। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 17.83 अरब डॉलर था। इस तरह पांच महीनों में अफ्रीका को भारतीय निर्यात में 47 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
अफ्रीका में चीन भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ा प्रतिस्पर्धी है। चीन महाद्वीप के 53 देशों को सालाना 225 अरब डॉलर का सामान निर्यात करता है। दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया और मिस्र चीन से सबसे अधिक माल खरीदने वाले देशों में शामिल हैं। अब इन बाजारों में भारतीय सामान की मांग भी तेजी से बढ़ रही है।
दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया और मिस्र में बढ़ा निर्यात
चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में दक्षिण अफ्रीका को भारत के निर्यात में पिछले वित्त वर्ष की पहली छमाही के मुकाबले 51 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसी अवधि में नाइजीरिया को निर्यात 19.6 प्रतिशत और मिस्र को निर्यात 72 प्रतिशत बढ़ा।
भारत के कुल निर्यात में दक्षिण अफ्रीका की हिस्सेदारी बढ़कर 2.2 प्रतिशत पहुंच गई है। इन तीन प्रमुख बाजारों के अलावा भारतीय निर्यातक केन्या, तंजानिया और अफ्रीका के अन्य देशों में भी अपना कारोबार बढ़ा रहे हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स से ऑटोमोबाइल तक भारतीय सामान की मांग
अफ्रीकी बाजारों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों से लेकर ऑटोमोबाइल तक का निर्यात कर रहा है। अफ्रीका के कई देशों में विकास दर करीब चार प्रतिशत के आसपास है और वहां उपभोक्ता वस्तुओं की मांग लगातार बढ़ रही है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर बन रहे हैं।
निर्यातकों के मुताबिक, पहले अफ्रीकी देशों में सामान भेजने और भुगतान मिलने को लेकर आशंकाएं रहती थीं। इस वजह से कई कारोबारी इन बाजारों में निर्यात करने से बचते थे। हालांकि, उनका कहना है कि सरकार की नीतिगत सुधारों के बाद अब अफ्रीका में कारोबार करना पहले की तुलना में आसान हुआ है। भारतीय निर्यातक अब इन बाजारों में चीनी उत्पादों से मुकाबला कर रहे हैं।
आसियान देशों को निर्यात में 56 प्रतिशत का उछाल
अफ्रीका के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बाजारों में भी भारतीय निर्यात बढ़ा है। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों में आसियान देशों को भारत के निर्यात में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 56 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
भारत के निर्यात में यह तेजी ऐसे समय आई है, जब यूरोपीय संघ को होने वाले निर्यात में वृद्धि महज चार प्रतिशत रही। अफ्रीका और आसियान जैसे बाजारों में बढ़ती मांग भारतीय निर्यात को गति देने में अहम भूमिका निभा रही है।