{"vars":{"id": "130921:5012"}}

भारत ने कर दिया मेडिकल टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा कमाल? 12 साल की मेहनत से बनी पहली स्वदेशी MRI मशीन

भारत ने मेडिकल टेक्नोलॉजी में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए पहली स्वदेशी MRI मशीन विकसित की है। बेंगलुरु की VoxelGrids ने 12 साल की रिसर्च के बाद इसे तैयार किया। रतन टाटा और Zoho का सहयोग मिलने से बनी यह मशीन MRI जांच को सस्ता और अधिक सुलभ बना सकती है।
 

India First MRI Machine: भारत ने मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। बेंगलुरु स्थित डीप-टेक स्टार्टअप VoxelGrids ने देश की पहली पूरी तरह स्वदेशी 1.5 टेस्ला MRI (मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) मशीन विकसित की है। लगभग 12 वर्षों की रिसर्च के बाद तैयार हुई यह मशीन भारत की आयातित MRI तकनीक पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

12 साल की रिसर्च के बाद मिली सफलता

VoxelGrids के संस्थापक अर्जुन अरुणाचलम और उनकी टीम ने इस तकनीक पर करीब 12 वर्षों तक काम किया। इस दौरान कंपनी को तकनीकी और वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन लगातार शोध के बाद भारत में ही डिजाइन और विकसित MRI सिस्टम तैयार किया गया।

रतन टाटा और Zoho से मिला बड़ा सहयोग

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने में Zoho Corporation और उद्योग जगत के वरिष्ठ निवेशकों का सहयोग महत्वपूर्ण रहा। Zoho के संस्थापक श्रीधर वेम्बू लंबे समय से भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने की वकालत करते रहे हैं। शुरुआती चरण में VoxelGrids को टाटा ट्रस्ट्स के इनोवेशन प्लेटफॉर्म से भी सहयोग मिला, जिससे इस तकनीक के विकास को गति मिली।

क्या है इस MRI मशीन की सबसे बड़ी खासियत?

VoxelGrids की स्वदेशी MRI मशीन कई मामलों में पारंपरिक आयातित मशीनों से अलग बताई जा रही है।

  • पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित की गई।
  • 1.5 टेस्ला क्षमता वाली हाई-फील्ड MRI मशीन।
  • लिक्विड हीलियम की आवश्यकता नहीं, जिससे निर्माण और संचालन लागत कम होती है।
  • पारंपरिक MRI की तुलना में लगभग 40% तक कम लागत।
  • बिजली की कम खपत।
  • छोटे और मध्यम अस्पतालों के लिए Pay-per-use मॉडल की सुविधा।


कहां लगी भारत की पहली स्वदेशी MRI मशीन?

इस स्वदेशी MRI मशीन को महाराष्ट्र के चंद्रपुर कैंसर केयर फाउंडेशन में स्थापित किया गया है। यहां मरीजों पर इसका उपयोग शुरू हो चुका है। भविष्य में कंपनी देशभर के अस्पतालों तक इसे पहुंचाने की योजना पर काम कर रही है।

भारत के लिए क्यों है यह बड़ी उपलब्धि?

अब तक भारत में उपयोग होने वाली अधिकांश हाई-एंड MRI मशीनें विदेशों से आयात की जाती थीं। इससे उनकी कीमत और रखरखाव का खर्च काफी अधिक होता था। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी MRI तकनीक के आने से- आयात पर निर्भरता घटेगी। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में MRI सेवाओं का विस्तार होगा। मरीजों के लिए जांच की लागत कम हो सकती है। भारत मेडिकल उपकरण निर्माण में वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बना सकेगा।

आगे क्या है कंपनी की योजना?

VoxelGrids फिलहाल अपने बेंगलुरु संयंत्र में सीमित संख्या में MRI मशीनों का उत्पादन कर रही है। कंपनी का लक्ष्य आने वाले समय में उत्पादन क्षमता बढ़ाकर देशभर के अस्पतालों तक स्वदेशी MRI मशीन पहुंचाना और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी प्रवेश करना है।