पाकिस्तान की बढ़ती समुद्री ताकत से भारत अलर्ट! जर्मनी से 90 हजार करोड़ रुपये की 6 हाईटेक AIP पनडुब्बियां खरीदने की तैयारी
पाकिस्तान की AIP पनडुब्बी तैनाती और चीन-पाक रक्षा सहयोग के बीच भारत जर्मनी से 90 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली छह अत्याधुनिक AIP पनडुब्बियां खरीदने की तैयारी में है। यह सौदा भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने और हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
AIP Submarine: हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते सामरिक समीकरणों और पाकिस्तान की बढ़ती नौसैनिक क्षमताओं के बीच भारत अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक भारत अगले महीने जर्मनी के साथ छह अत्याधुनिक एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक वाली पनडुब्बियों की खरीद के लिए करीब 90 हजार करोड़ रुपये के मेगा रक्षा सौदे पर हस्ताक्षर कर सकता है। यह परियोजना लंबे समय से लंबित है और अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।
इस सौदे को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब पाकिस्तान को चीन से AIP तकनीक वाली पनडुब्बियां मिलनी शुरू हो चुकी हैं और उसने अपनी पहली AIP पनडुब्बी PNS Hangor को बंगाल की खाड़ी में तैनात करने का ऐलान भी किया है।
बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तान की तैनाती से बढ़ी चिंता
रक्षा सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान वर्ष 1971 के बाद पहली बार बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में अपनी पनडुब्बी की तैनाती करने जा रहा है। यह कदम भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि AIP तकनीक वाली पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के भीतर रहकर मिशन संचालित कर सकती हैं और उनकी पहचान करना बेहद कठिन होता है। चीन-पाकिस्तान के बढ़ते रक्षा सहयोग के बीच यह तैनाती भारत के लिए एक नई समुद्री चुनौती का संकेत है।
क्या है AIP तकनीक और क्यों है इतनी खास?
एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में कहीं अधिक उन्नत मानी जाती है। इस तकनीक में ऊर्जा उत्पादन के लिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल और संग्रहित ऑक्सीजन का उपयोग किया जाता है, जिससे पनडुब्बी को बार-बार सतह पर आने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
AIP पनडुब्बियों की प्रमुख विशेषताएं-
- 2 से 3 सप्ताह तक लगातार पानी के भीतर संचालन
- दुश्मन की निगरानी से बचने की अधिक क्षमता
- बेहद कम ध्वनि और कम उत्सर्जन
- लंबी दूरी तक गुप्त सैन्य अभियान चलाने की क्षमता
इसके विपरीत, मौजूदा डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को हर 24 से 48 घंटे में एक बार समुद्र की सतह पर आकर ऑक्सीजन लेनी पड़ती है, जिससे उनके पकड़े जाने या हमले का जोखिम बढ़ जाता है।
भारत की मेगा योजना: मेक इन इंडिया के तहत होगा निर्माण
रक्षा मंत्रालय नौसेना के लिए छह नई AIP पनडुब्बियों की खरीद प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा है। जर्मनी की प्रमुख रक्षा कंपनी ThyssenKrupp Marine Systems (TKMS) इस परियोजना की तकनीकी साझेदार होगी।
विशेष बात यह है कि इन पनडुब्बियों का निर्माण मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत में ही किया जाएगा। इसके लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। सूत्रों के मुताबिक समझौते के बाद पहली पनडुब्बी वर्ष 2033 तक भारतीय नौसेना को सौंपे जाने की संभावना है।
पाकिस्तान के पास कितनी AIP पनडुब्बियां?
पाकिस्तान ने चीन से कुल आठ AIP तकनीक वाली पनडुब्बियां खरीदने का समझौता किया है। इनमें चार पनडुब्बियां चीन में तैयार हो रही हैं, जबकि चार का निर्माण कराची शिपयार्ड में तकनीक हस्तांतरण के जरिए किया जाएगा। पहली पनडुब्बी पाकिस्तान को मिल चुकी है और अब उसे बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में तैनात करने की तैयारी चल रही है।
भारत के सामने दोहरी चुनौती
भारत की समुद्री सीमा 11 हजार किलोमीटर से अधिक लंबी है। एक ओर चीन अपनी नौसेना को दुनिया की सबसे शक्तिशाली नौसेनाओं में शामिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर वह पाकिस्तान को आधुनिक सैन्य तकनीक उपलब्ध कराकर उसकी समुद्री क्षमताओं को भी मजबूत कर रहा है।
ऐसे में भारतीय नौसेना को एक साथ चीन और पाकिस्तान दोनों की गतिविधियों पर नजर रखनी पड़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित जर्मन AIP पनडुब्बी सौदा भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त दिलाने में मदद करेगा।
क्यों जरूरी हैं नई पनडुब्बियां
नौसैनिक मामलों के विशेषज्ञ कैप्टन डी.के. शर्मा के अनुसार AIP तकनीक वाली पनडुब्बियां आधुनिक नौसैनिक युद्ध की जरूरत बन चुकी हैं। उनका कहना है कि हफ्तों तक पानी के भीतर रहने की क्षमता किसी भी नौसेना की मारक क्षमता और रणनीतिक प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है।
उन्होंने बताया कि फ्रांस की तकनीक से तैयार की जा रही स्कॉर्पीन श्रेणी की भारतीय पनडुब्बियों के लिए DRDO ने AIP प्लग विकसित कर लिया है, लेकिन उन्हें पूरी तरह परिचालन में आने में अभी समय लगेगा।
परमाणु पनडुब्बी से सस्ता और प्रभावी विकल्प
विशेषज्ञों के मुताबिक AIP पनडुब्बियां परमाणु चालित पनडुब्बियों का व्यावहारिक विकल्प मानी जाती हैं। परमाणु पनडुब्बियों की लागत बहुत अधिक होती है और उनका आकार भी बड़ा होता है, जबकि AIP पनडुब्बियां अपेक्षाकृत कम लागत में लंबी अवधि तक गुप्त अभियान चलाने में सक्षम होती हैं।
यही वजह है कि अमेरिका, रूस, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और पाकिस्तान जैसे कई देश इस तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं।
भारत का प्रस्तावित जर्मन सौदा केवल छह नई पनडुब्बियों की खरीद नहीं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच नौसैनिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।