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भारत के एक फैसले से नेपाल का चाय उद्योग संकट में! 83 फैक्ट्रियां बंद, किसानों ने भी छोड़ी खेती

भारत द्वारा चाय आयात के लिए लागू नई गुणवत्ता जांच प्रक्रिया के बाद नेपाल का चाय उद्योग संकट में आ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 83 चाय फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं, जबकि किसानों ने खेती छोड़ने की चेतावनी दी है। हजारों टन चाय गोदामों और सीमा पर फंसी हुई है।

 

Nepal Tea Industry: भारत द्वारा चाय आयात को लेकर लागू किए गए नए गुणवत्ता जांच नियमों का असर अब नेपाल के चाय उद्योग पर साफ दिखाई देने लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय चाय बोर्ड की नई जांच प्रक्रिया के बाद नेपाल के पूर्वी इलाकों में 83 चाय फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं। वहीं चाय उत्पादकों और किसानों ने भी भारी आर्थिक नुकसान की आशंका जताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

भारत ने लागू की नई गुणवत्ता जांच व्यवस्था

भारत और नेपाल के बीच चाय व्यापार लंबे समय से होता रहा है, लेकिन अब भारतीय चाय बोर्ड ने आयातित चाय की गुणवत्ता जांच को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। 1 मई से लागू स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत नेपाल से आने वाली हर चाय खेप की गुणवत्ता जांच अनिवार्य कर दी गई है।

नई व्यवस्था के अनुसार जब तक लैब परीक्षण की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक चाय की खेप बाजार में नहीं बेची जा सकती। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने में कई बार 15 दिन या उससे अधिक समय लग जाता है। यदि किसी सैंपल की रिपोर्ट मानकों पर खरी नहीं उतरती, तो पूरी खेप को वापस भेजना या नष्ट करना पड़ सकता है।

83 चाय फैक्ट्रियों ने बंद किया संचालन

नेपाल के प्रमुख समाचार पत्र काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की नई जांच प्रक्रिया के विरोध में नेपाल के इलाम और झापा जिलों में स्थित करीब 83 चाय फैक्ट्रियों ने अपना संचालन बंद कर दिया है।

नेपाल चाय उत्पादक संघ के प्रतिनिधि इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे हैं और भारत के साथ राजनयिक स्तर पर बातचीत की मांग कर रहे हैं।

संघ के अध्यक्ष आदित्य पराजुली ने कहा कि उद्योग लगातार सरकार को अपनी समस्याओं से अवगत करा रहा था, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री मालिक और उत्पादक काठमांडू पहुंचकर संबंधित मंत्रालयों के अधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं।

गोदामों और सीमा पर फंसी हजारों टन चाय

नेपाल हर वर्ष लगभग 27 हजार टन चाय का उत्पादन करता है। इसमें करीब 8 हजार टन ऑर्थोडॉक्स चाय और 19 हजार टन सीटीसी चाय शामिल होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार फिलहाल लगभग 1,000 टन नेपाली चाय देश के विभिन्न गोदामों में पड़ी हुई है, जबकि करीब 300 टन चाय भारत में जांच और मंजूरी की प्रक्रिया में फंसी हुई है। उत्पादकों का कहना है कि लंबे समय तक भंडारण से चाय की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

किसानों और श्रमिकों की बढ़ी चिंता

नेपाल के चाय उत्पादकों का कहना है कि यह संकट केवल निर्यातकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे हजारों किसान और श्रमिक प्रभावित हो रहे हैं, जिनकी आजीविका सीधे तौर पर चाय उद्योग पर निर्भर है।

उद्योग से जुड़े लोगों का आरोप है कि नई गैर-टैरिफ बाधाओं के कारण व्यापार प्रभावित हो रहा है और इसका असर पूरे उत्पादन तंत्र पर पड़ रहा है। कई किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे चाय की खेती से दूरी बनाने को मजबूर हो सकते हैं।

भारत-नेपाल चाय व्यापार पर बढ़ा दबाव

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की नई गुणवत्ता जांच नीति का उद्देश्य आयातित चाय की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है, लेकिन इसके कारण नेपाल के चाय उद्योग पर दबाव बढ़ गया है। अब दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर बातचीत और समाधान की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

फिलहाल नेपाल के चाय उद्योग से जुड़े कारोबारी, किसान और श्रमिक इस उम्मीद में हैं कि दोनों देशों के बीच कोई ऐसा रास्ता निकले जिससे व्यापार भी जारी रहे और उद्योग को नुकसान से भी बचाया जा सके।