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India US Trade Deal: भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बनी बात! मार्को रुबियो ने बताया कितना काम बाकी

भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर बड़ी उम्मीद जगी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि दोनों देश समझौते के बेहद करीब हैं और कुछ मुद्दे बाकी हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। जानिए रूस से तेल खरीद, अमेरिकी टैरिफ और ऊर्जा सहयोग का इस समझौते से क्या संबंध है।

 

 

 

 

India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते की बातचीत अब निर्णायक दौर में पहुंचती दिख रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि दोनों देश ट्रेड डील के बेहद करीब हैं और समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कुछ मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि दोनों देश जल्द समझौते पर पहुंच सकते हैं।

मार्को रुबियो बोले- समझौते के बेहद करीब हैं दोनों देश

भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत की। इस दौरान व्यापार समझौते के साथ ऊर्जा, तकनीक, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा हुई।

रुबियो ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कहा कि दोनों देश समझौते के उतने करीब हैं, जितना किसी समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले पहुंचा जा सकता है। उनके मुताबिक, अब कुछ ही मुद्दों पर बातचीत बाकी है और उन्हें जल्द सुलझाने की उम्मीद है।

रुबियो के बयान से संकेत मिलता है कि दोनों देश लंबे समय से अटके समझौते को आगे बढ़ाने के लिए गंभीरता से काम कर रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने भी दिया ट्रेड डील पर अपडेट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत के साथ व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि प्रस्तावित समझौता सामान्य व्यापार समझौतों से अलग स्वरूप का हो सकता है।

ट्रेड डील पर बातचीत एक साल से अधिक समय से चल रही है। दोनों देशों के बीच अमेरिकी टैरिफ और भारत की ओर से रूस से कच्चा तेल खरीदने जैसे मुद्दों के कारण वार्ता प्रभावित हुई थी।

रूस से तेल खरीद और अमेरिकी टैरिफ बने थे बड़ी चुनौती

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता में अमेरिकी टैरिफ एक बड़ा मुद्दा रहा है। अगस्त 2025 में बातचीत टूटने के बाद अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर कई मामलों में 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था।

फरवरी में हुए एक फ्रेमवर्क के तहत टैरिफ दर को घटाकर 18 प्रतिशत किया गया, लेकिन इसके बाद भी समझौते को अंतिम रूप देने में देरी हुई। भारत की ओर से रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदना भी दोनों देशों के संबंधों में तनाव का कारण रहा।

हाल ही में ट्रंप प्रशासन की ओर से रूस के ऊर्जा निर्यात से जुड़े संभावित अतिरिक्त दंडात्मक उपायों में भारत को राहत दिए जाने से बातचीत के लिए माहौल बेहतर होने की उम्मीद बढ़ी है।

ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर भी हुई बातचीत

मुंबई में मार्को रुबियो और एस. जयशंकर की बैठक में व्यापार के अलावा ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक और रक्षा सहयोग पर भी चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

अमेरिकी पक्ष ने भारत को ऊर्जा आयात के स्रोतों में विविधता लाने और अमेरिकी तकनीक एवं प्रणालियों की खरीद बढ़ाने की दिशा में सहयोग की बात कही। इसके अलावा पश्चिम एशिया समेत क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचार साझा किए गए।

रुबियो ने भारत के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उनके भारत दौरे में गुजरात के जामनगर स्थित रिफाइनरी का दौरा और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी से मुलाकात भी शामिल है।

अब समझौते पर हस्ताक्षर का इंतजार

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर दोनों पक्षों के हालिया बयान सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। हालांकि, समझौते की आधिकारिक घोषणा और उस पर हस्ताक्षर होने तक इसे अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।

अगर दोनों देश बचे हुए मुद्दों पर सहमति बना लेते हैं, तो लंबे समय से जारी व्यापार वार्ता अपने अगले चरण में पहुंच सकती है। फिलहाल, सबकी नजर इस बात पर है कि भारत और अमेरिका समझौते को कब अंतिम रूप देते हैं और इसकी शर्तें क्या होती हैं।