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समुद्री घुसपैठ और समुद्री डकैती पर नजर रखेगा, भारतीय नौसेना के लिए कोलकाता में लॉन्च हुआ गश्ती पोत 'श्रेयस'

भारतीय नौसेना के लिए कोलकाता में GRSE ने अत्याधुनिक गश्ती पोत श्रेयस का जलावतरण किया। चार पोतों की श्रृंखला का यह तीसरा NGOPV समुद्री निगरानी, समुद्री डकैती रोकने, खोज एवं बचाव अभियानों और अपतटीय परिसंपत्तियों की सुरक्षा में भूमिका निभाएगा। पोत की लंबाई लगभग 113 मीटर और विस्थापन करीब 3,000 टन है।
 

Indian Navy Shreyas: भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने 10 अक्टूबर को कोलकाता में अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत 'श्रेयस' का जलावतरण किया। यह नौसेना के लिए GRSE द्वारा बनाए जा रहे चार NGOPV पोतों की श्रृंखला का तीसरा पोत है।

समुद्री निगरानी से लेकर बचाव अभियानों तक आएगा काम

'श्रेयस' को समुद्र में निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान, समुद्र में स्थित महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की सुरक्षा और समुद्री डकैती रोकने जैसे कार्यों के लिए तैयार किया जा रहा है। इन पोतों की मदद से भारतीय नौसेना की समुद्र में लगातार मौजूदगी और विभिन्न परिस्थितियों में अभियान चलाने की क्षमता मजबूत होगी।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, NGOPV यानी नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल स्वदेशी डिजाइन और निर्माण पर आधारित हैं। इनका निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) और कोलकाता स्थित GRSE में किया जा रहा है। यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।

113 मीटर लंबा और करीब 3,000 टन का पोत

'श्रेयस' की लंबाई लगभग 113 मीटर और चौड़ाई 14.6 मीटर है। इसका विस्थापन करीब 3,000 टन है। उपलब्ध तकनीकी जानकारी के मुताबिक, यह अधिकतम 23 नॉट की गति से चल सकता है। 14 नॉट की गति पर इसकी परिचालन दूरी लगभग 8,500 समुद्री मील तक बताई गई है।

इन क्षमताओं के चलते पोत लंबी अवधि तक समुद्री क्षेत्रों में निगरानी और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां निभाने में सक्षम होगा। इसका उपयोग संदिग्ध जहाजों की जांच, घुसपैठ रोकने, समुद्री डकैती विरोधी अभियानों और आपदा के समय मानवीय सहायता में भी किया जा सकेगा।

वाइस एडमिरल अजय कोचर की मौजूदगी में हुआ जलावतरण

कोलकाता स्थित GRSE के राजाबगान डकयार्ड में आयोजित समारोह में भारतीय नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर मौजूद रहे। उनकी पत्नी रेयमान कोचर ने पारंपरिक प्रक्रिया के तहत पोत का जलावतरण किया।

जलावतरण के बाद पोत पर विभिन्न परीक्षण किए जाएंगे और आवश्यक सेंसर तथा अन्य उपकरण लगाए जाएंगे। परीक्षण और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे भारतीय नौसेना को सौंपा जाएगा।

पांच महीने से कम समय में तीसरा पोत लॉन्च

GRSE ने इस श्रृंखला के पहले पोत 'संघमित्रा' का जलावतरण 20 मई 2026 को और दूसरे पोत 'श्रुति' का 11 अगस्त 2026 को किया था। अब 'श्रेयस' के जलावतरण के साथ कंपनी ने चार पोतों की अपनी श्रृंखला में तीसरा महत्वपूर्ण पड़ाव हासिल किया है।

भारतीय नौसेना के 11 NGOPV पोतों वाले व्यापक कार्यक्रम के तहत अलग-अलग शिपयार्ड में निर्माण कार्य चल रहा है। इन पोतों के शामिल होने से समुद्री निगरानी, अपतटीय संपत्तियों की सुरक्षा और आपातकालीन अभियानों में नौसेना की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।