भारत का ‘शेषनाग-150’ ड्रोन बना नया ब्रह्मास्त्र, 1000 किमी दूर तक दुश्मन के एयर डिफेंस को कर सकता है तबाह
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी Iran–Israel conflict के बीच भारत ने आधुनिक ड्रोन युद्ध की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बेंगलुरु स्थित डिफेंस स्टार्टअप NewSpace Research and Technologies (NRT) ने ‘शेषनाग-150’ नाम का अत्याधुनिक ड्रोन विकसित किया है। यह ड्रोन दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को निष्क्रिय करने और लंबी दूरी तक सटीक हमले करने में सक्षम माना जा रहा है।
‘शेषनाग-150’ की रेंज लगभग 1000 किलोमीटर बताई जा रही है और यह लगातार करीब 5 घंटे तक उड़ान भर सकता है। ड्रोन अपने साथ 40 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जाने में सक्षम है, जिससे यह दुश्मन के बंकरों, सैन्य अड्डों और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना सकता है। इसकी खासियत यह है कि यह जीपीएस के बिना भी विजुअल नेविगेशन सिस्टम के जरिए लक्ष्य की पहचान कर सकता है, जिससे इसे जैम करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
स्वार्म तकनीक से होगा हमला
‘शेषनाग-150’ की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्वार्म अटैक तकनीक है। इस तकनीक में कई ड्रोन एक साथ झुंड बनाकर हमला करते हैं। जब बड़ी संख्या में ड्रोन एक साथ दुश्मन की ओर बढ़ते हैं तो उसका एयर डिफेंस सिस्टम भ्रमित हो जाता है और उन्हें रोकना बेहद कठिन हो जाता है।
इस ड्रोन में विशेष ‘मदर कोड’ एल्गोरिथम इंजन का इस्तेमाल किया गया है, जो इसे नेटवर्क आधारित और काफी हद तक स्वायत्त बनाता है। यह कम से कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ लक्ष्य की पहचान कर उसे नष्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है।
शाहेद और ल्यूकस ड्रोन से तुलना
दुनिया में इस समय ईरान के Shahed drone और अमेरिका के LUCAS drone की काफी चर्चा हो रही है, लेकिन ‘शेषनाग-150’ अपनी अलग पहचान बना रहा है। अमेरिकी ल्यूकस ड्रोन जहां सैटेलाइट नेटवर्क पर निर्भर है, वहीं शेषनाग-150 को भविष्य में विजुअल नेविगेशन आधारित सिस्टम से लैस किया जा रहा है, जिससे इसे इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से बचाया जा सकेगा।
तुलनात्मक रूप से ईरानी शाहेद ड्रोन की रेंज अधिक हो सकती है, लेकिन सटीकता और स्वार्म तकनीक के मामले में भारतीय ड्रोन को काफी उन्नत माना जा रहा है।
भविष्य के युद्ध की नई रणनीति
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्धों में महंगी मिसाइलों के बजाय कम लागत वाले लेकिन सटीक ड्रोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भारत की नई रणनीति भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसमें हाई-वैल्यू टारगेट्स पर सटीक प्रहार को प्राथमिकता दी जा रही है।
बेंगलुरु की प्रयोगशालाओं में विकसित यह ‘साइलेंट किलर’ भारत की सैन्य शक्ति को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है और आने वाले समय में ड्रोन युद्ध की रणनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।