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भारत-फ्रांस मेगा डील: 114 मेक-इन-इंडिया राफेल फाइटर जेट को मिली मंजूरी,कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये

 

New Delhi : रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 मेक-इन-इंडिया राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है। यह दुनिया की अब तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील में से एक है, जिसकी कुल अनुमानित कीमत 3.25 लाख करोड़ रुपये है। डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की महत्वपूर्ण बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिली है।

प्रमुख बिंदु  

- तत्काल डिलीवरी : 16 राफेल विमान फ्रांस से सीधे तुरंत उड़ान भरने की स्थिति में खरीदे जा सकते हैं।  

- भारत में निर्माण : बाकी विमानों का 80% से अधिक निर्माण भारत में होगा।  

- स्वदेशी हिस्सेदारी : राफेल फाइटर जेट में करीब *60%* स्वदेशी हथियार, उपकरण और कंपोनेंट्स लगेंगे।  

- विमान प्रकार : 88 सिंगल-सीटर और 26 दो-सीटर राफेल।  

- स्क्वाड्रन मजबूती : इन 114 राफेल से वायुसेना की 5-6 स्क्वाड्रन (प्रत्येक स्क्वाड्रन में 18-20 विमान) पूरी तरह तैयार हो जाएंगी।  

डीएसी से पहले की मंजूरी 

पिछले महीने रक्षा मंत्रालय के डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। अब DAC की मंजूरी के बाद यह प्रोजेक्ट वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास जाएगा। बहुत संभव है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की 17-19 फरवरी की भारत यात्रा के दौरान इस सौदे को अंतिम रूप दिया जा सके।

यह डील क्यों खास है?  

- भारतीय वायुसेना वर्तमान में लगभग 30 लड़ाकू स्क्वाड्रन संचालित कर रही है, जबकि स्वीकृत क्षमता 42 स्क्वाड्रन है। चीन और पाकिस्तान से बढ़ते खतरे के बीच यह कमी चिंता का विषय है।  

- ऑपरेशन सिंदूर में मौजूदा 36 राफेल ने अपनी ऑपरेशनल क्षमता साबित की है। वायुसेना के वाइस चीफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने राफेल को ऑपरेशन सिंदूर का हीरो करार दिया था।  

- ये विमान मेटियोर, मीका, स्कैल्प जैसी घातक फ्रांसीसी मिसाइलों से लैस हैं। मेक-इन-इंडिया राफेल में भारत में बनी मिसाइलों का भी इस्तेमाल संभव होगा।  

पिछली राफेल डील्स 

- 2016 में भारत ने फ्रांस से सीधे 36 राफेल खरीदे थे (कुल कीमत करीब 59 हजार करोड़ रुपये)।  

- अप्रैल 2025 में नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन वर्जन का सौदा हुआ (करीब 63 हजार करोड़ रुपये), जो INS विक्रांत पर तैनात होंगे।  

क्यों छोड़ा गया MRFA प्रोजेक्ट?  

भारतीय वायुसेना ने घटती स्क्वाड्रन को देखते हुए 114 राफेल मेक-इन-इंडिया में बनाने का प्रस्ताव दिया था। MRFA (मीडियम वेट फाइटर) प्रोजेक्ट में कई विदेशी कंपनियां टेंडर में हिस्सा ले सकती थीं, लेकिन अब यह सौदा सीधे भारत-फ्रांस सरकारों के बीच जीटूजी (Government-to-Government) डील होगा। दसॉल्ट एविएशन भारत में किसी स्वदेशी कंपनी के साथ मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगी।