ईरान युद्ध का असर! भारत में महंगाई का खतरा, सरकार ला सकती है बड़ा राहत पैकेज
मध्य-पूर्व में युद्ध जैसे हालात के बीच भारत सरकार अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनाए रखने के लिए राहत पैकेज पर विचार कर रही है। निर्यातकों और छोटे उद्यमियों को जल्द वित्तीय सहायता मिल सकती है। कच्चे तेल और धातुओं की कीमतें बढ़ने से महंगाई और उत्पादन लागत को लेकर चिंता बढ़ गई है।
Iran war impact Indian economy: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारत की आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखने लगा है। ऐसे में केंद्र सरकार आर्थिक विकास की रफ्तार को बनाए रखने के लिए राहत पैकेज लाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक विभिन्न मंत्रालयों में इसको लेकर चर्चा शुरू हो चुकी है। कोशिश यह है कि देश की आर्थिक विकास दर सात प्रतिशत से ऊपर बनाए रखने के लिए समय रहते कदम उठाए जाएं।
निर्यातकों को जल्द मिल सकती है राहत
सरकार निर्यात क्षेत्र को जल्द राहत देने पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि अगले एक सप्ताह के भीतर निर्यातकों के लिए वित्तीय सहायता से जुड़ी घोषणा की जा सकती है। युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन में बाधा और निर्माण लागत बढ़ने से निर्यातकों और छोटे उद्योगों की लागत में तेजी से इजाफा हुआ है। इससे उनके उत्पादन और भुगतान चक्र पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
छोटे उद्यमियों की वर्किंग कैपिटल पर खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध का सबसे ज्यादा असर छोटे और मझोले उद्यमों पर पड़ सकता है। निर्माण लागत बढ़ने और भुगतान अटकने से उनकी कार्यशील पूंजी प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि सरकार छोटे उद्यमियों को वित्तीय मदद देने के विकल्पों पर भी विचार कर रही है, ताकि उत्पादन और रोजगार पर नकारात्मक असर न पड़े।
एक लाख करोड़ का आर्थिक स्थिरता फंड
इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में युद्ध से उत्पन्न आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए एक लाख करोड़ रुपये के आर्थिक स्थिरता फंड की घोषणा की है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह एक दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। वहीं प्रस्तावित राहत पैकेज के जरिए तत्काल प्रभाव से उद्योग और व्यापार को सहारा देने की कोशिश की जा सकती है।
महंगाई और कच्चे माल की कीमतें बनी चिंता
आर्थिक जानकारों के मुताबिक युद्ध की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित होने लगी है। कच्चे तेल, गैस और एल्युमीनियम, तांबा, टिन, जिंक तथा निकेल जैसी धातुओं की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है। आंकड़ों के अनुसार फरवरी महीने में इन धातुओं की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 12 से 53 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें बढ़ने की आशंका है।
सरकार की प्राथमिकता: उत्पादन और रोजगार
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर महंगाई बढ़ती है और वस्तुओं की मांग घटती है तो इसका असर जीएसटी संग्रह और कंपनियों के मुनाफे पर भी पड़ेगा। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता मैन्यूफैक्चरिंग गतिविधियों को जारी रखना और रोजगार पर असर को सीमित करना होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में कहा है कि वैश्विक हालात से होने वाले आर्थिक प्रभाव को कम से कम करने के लिए सरकार हर संभव कदम उठाएगी।