ITR Filing 2026: ITR में भूलकर भी न करें ये 10 गलतियां, आ सकता है इनकम टैक्स नोटिस
ITR Filing 2026: आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन शुरू हो चुका है और लाखों लोग अपना रिटर्न भर रहे हैं। अगर आप भी ITR फाइल करने की तैयारी कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। रिटर्न भरते समय की गई छोटी-सी गलती भी नोटिस, जुर्माना या रिफंड में देरी की वजह बन सकती है। आयकर विभाग के अनुसार अब तक 40 लाख से ज्यादा लोग रिटर्न दाखिल कर चुके हैं, लेकिन हर साल बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका नुकसान बाद में उठाना पड़ता है।
सबसे पहले सही ITR फॉर्म चुनें
रिटर्न भरते समय सबसे पहली और सबसे बड़ी गलती गलत ITR फॉर्म का चयन करना है। आपकी आय के अनुसार अलग-अलग फॉर्म निर्धारित किए गए हैं। यदि आपने गलत फॉर्म भर दिया तो आयकर विभाग आपका रिटर्न अमान्य घोषित कर सकता है और आपको दोबारा पूरा रिटर्न दाखिल करना पड़ सकता है।
उदाहरण के तौर पर ITR-1 (सहज) केवल उन लोगों के लिए है जिनकी सालाना आय 50 लाख रुपये तक है और जिनकी कमाई मुख्य रूप से वेतन, एक मकान से आय या अन्य सामान्य स्रोतों से होती है।
किसी भी आय को छिपाने की गलती न करें
रिटर्न भरते समय अपनी हर तरह की आय का सही विवरण देना जरूरी है। कई लोग ब्याज से हुई आय, किराये की आय या अन्य कमाई का जिक्र नहीं करते। लेकिन अब आयकर विभाग बैंक, TDS, क्रेडिट कार्ड लेनदेन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड के जरिए इन जानकारियों का मिलान करता है। यदि आय छिपाई गई तो नोटिस आ सकता है।
गलत टैक्स छूट का दावा महंगा पड़ सकता है
बीते कुछ वर्षों में आयकर विभाग ने हजारों लोगों को फर्जी टैक्स छूट लेने पर नोटिस भेजे हैं। कई लोगों ने HRA, दान (Donation) और अन्य टैक्स छूट का गलत दावा किया था।
यदि आपने किसी भी कटौती या छूट का दावा किया है तो उसके सभी दस्तावेज सही होने चाहिए। गलत जानकारी देकर टैक्स बचाने की कोशिश बाद में परेशानी बढ़ा सकती है।
Form 16, AIS और Form 26AS का मिलान जरूर करें
ITR भरने से पहले अपने Form 16, Annual Information Statement (AIS) और Form 26AS का मिलान जरूर करें। यदि इन तीनों में दर्ज जानकारी अलग-अलग है और आपने बिना जांचे रिटर्न भर दिया तो विभाग इसे गलत रिपोर्टिंग मान सकता है और स्पष्टीकरण मांग सकता है।
आखिरी तारीख का इंतजार न करें
समय सीमा के बाद ITR दाखिल करने पर अतिरिक्त शुल्क, ब्याज और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वर्तमान में नौकरीपेशा और पेंशनभोगियों के लिए ITR-1 और ITR-2 दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। वहीं जिन कारोबारियों और पेशेवरों का टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है, उनके लिए ITR-3 और ITR-4 भरने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 तय की गई है।
रिटर्न भरने के बाद वेरिफाई करना न भूलें
सिर्फ ITR जमा करना काफी नहीं है। रिटर्न दाखिल करने के बाद 30 दिनों के भीतर उसका सत्यापन (Verification) करना जरूरी होता है। यदि तय समय में वेरिफिकेशन नहीं किया गया तो आपका रिटर्न अमान्य माना जा सकता है और पूरी प्रक्रिया फिर से करनी पड़ सकती है।
बैंक खाते की जानकारी दोबारा जांचें
रिफंड सीधे आपके बैंक खाते में आता है। इसलिए ITR भरते समय बैंक खाता संख्या और IFSC कोड सही भरना बेहद जरूरी है। छोटी सी गलती भी रिफंड अटकने की वजह बन सकती है।
सही टैक्स रिजीम चुनना भी जरूरी
पुरानी (Old Tax Regime) और नई (New Tax Regime) टैक्स व्यवस्था में से सही विकल्प चुनना भी बेहद महत्वपूर्ण है। बिना गणना किए टैक्स रिजीम चुनने से आपकी टैक्स देनदारी बढ़ सकती है। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले दोनों व्यवस्थाओं में टैक्स की तुलना जरूर करें और उसी के अनुसार विकल्प चुनें।
कैपिटल गेन की जानकारी छिपाना पड़ सकता है भारी
यदि आपने वित्त वर्ष के दौरान शेयर, म्यूचुअल फंड, जमीन, मकान या अन्य संपत्ति बेचकर लाभ कमाया है तो उसकी जानकारी ITR में देना जरूरी है। कैपिटल गेन की जानकारी छिपाने पर विभाग नोटिस भेज सकता है और आपके रिटर्न की जांच भी हो सकती है।
नौकरी बदली है तो दोनों कंपनियों की आय दिखाएं
अगर वित्त वर्ष के दौरान आपने नौकरी बदली है तो पुरानी और नई दोनों कंपनियों से मिली सैलरी का विवरण रिटर्न में शामिल करें।
दोनों नियोक्ताओं से प्राप्त Form-16 के आधार पर कुल आय और काटे गए TDS की जानकारी देना जरूरी है। किसी एक कंपनी की आय छिपाने से बाद में टैक्स का अंतर निकल सकता है।
ITR भरने से पहले इन बातों का रखें विशेष ध्यान
विशेषज्ञों का कहना है कि रिटर्न भरने से पहले सभी दस्तावेज, बैंक विवरण, टैक्स छूट, TDS रिकॉर्ड, AIS, Form 26AS और आय के सभी स्रोतों का मिलान जरूर कर लेना चाहिए। थोड़ी-सी सावधानी आपको आयकर विभाग के नोटिस, अतिरिक्त टैक्स और रिफंड में देरी जैसी समस्याओं से बचा सकती है। ITR दाखिल करने में जल्दबाजी करने के बजाय सही जानकारी के साथ रिटर्न भरना ही सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।