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जमुई कांड : नाबालिगों का वीडियो वायरल करने वाला रामाशीष चढ़ा पुलिस के हत्थे, आगे की कड़ियां खंगाल रही पुलिस

 

बिहार के जमुई जिले में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ हुई कथित अमर्यादित घटना का आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किए जाने के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। तकनीकी साक्ष्यों और साइबर सर्विलांस की मदद से पुलिस ने उस व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जिसने कथित तौर पर घटनास्थल का वीडियो रिकॉर्ड कर उसे सबसे पहले सोशल मीडिया पर प्रसारित किया था। गिरफ्तार आरोपित की पहचान मड़वा निवासी रामाशीष चौधरी के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक कुल चार आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

पुलिस के अनुसार, नाबालिगों से जुड़ी घटना का वीडियो रामाशीष चौधरी ने इंटरनेट मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर अपलोड और प्रसारित किया था। वीडियो के तेजी से वायरल होने के बाद मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आया। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर जांच के लिए विशेष टीम गठित की गई।


डिजिटल फुटप्रिंट से सामने आई आरोपित की पहचान

जांच के दौरान साइबर और तकनीकी टीम ने वीडियो के डिजिटल फुटप्रिंट्स तथा आईपी ट्रेल की पड़ताल की। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस उस व्यक्ति तक पहुंची, जिसने वीडियो को इंटरनेट पर प्रसारित किया था। इसके बाद पुलिस टीम ने मड़वा में घेराबंदी कर रामाशीष चौधरी को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपित से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि वीडियो उसने खुद बनाया था या उसे किसी अन्य व्यक्ति से प्राप्त हुआ था। इसके अलावा वीडियो को किन-किन व्हाट्सएप ग्रुप, सोशल मीडिया अकाउंट या अन्य प्लेटफॉर्म पर भेजा और आगे प्रसारित किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है।


वीडियो शेयर करने वालों पर भी होगी कार्रवाई

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों से संबंधित किसी आपत्तिजनक वीडियो को बनाना, सार्वजनिक करना या उसे आगे शेयर करना गंभीर कानूनी मामला है। ऐसे वीडियो को वायरल करना पीड़ितों की निजता और गरिमा को प्रभावित करता है। जांच टीम वीडियो बनाने से लेकर उसे पहली बार पोस्ट करने और आगे फॉरवर्ड या री-पोस्ट करने वाले लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिगों से जुड़े किसी भी आपत्तिजनक वीडियो को डाउनलोड, शेयर या दोबारा प्रसारित न करें। यदि ऐसा कोई वीडियो किसी व्यक्ति के मोबाइल या सोशल मीडिया अकाउंट पर पहुंचता है, तो उसे आगे प्रसारित करने के बजाय संबंधित पुलिस अधिकारियों को इसकी सूचना दें।