{"vars":{"id": "130921:5012"}}

मेरे पिता की वर्दी खून से लाल थी... जंतर-मंतर बवाल के बाद पहली बार बोले घायल पुलिसकर्मियों के परिजन, कहा- हमारी भी सुनी जाए

दिल्ली के जंतर-मंतर हिंसा मामले में घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना दर्द साझा किया। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पत्थर, गमले और जूतों से हमले का आरोप लगाया तथा संसद और सरकार से न्याय व पुलिस का पक्ष रखने की मांग की।
 

Jantar Mantar Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए विवादित प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा साझा की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिवारों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल पर पत्थरों, गमलों, जूतों और चप्पलों से हमला किया गया, जिसमें 5 आईपीएस अधिकारियों सहित 180 पुलिसकर्मी घायल हो गए। वहीं, इस झड़प में करीब 60 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। परिजनों ने पूरे मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की।

'पिता ने कहा था, ये छात्र नहीं लग रहे'

घायल पुलिस अधिकारी के बेटे कुंजल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनके पिता उस दिन जंतर-मंतर पर फ्रंटलाइन बैरिकेड्स पर तैनात थे। उन्होंने बताया कि प्रदर्शन शुरू होने के बाद उनके पिता लगातार कहते थे कि वहां मौजूद लोग सामान्य छात्र नहीं लग रहे थे और भीड़ में असामाजिक तत्व शामिल हो चुके हैं।

कुंजल ने कहा कि अगले ही दिन हिंसा में उनके पिता गंभीर रूप से घायल हो गए। जब वे अस्पताल पहुंचे तो उनकी वर्दी खून से सनी हुई थी। उन्होंने कहा, "पापा ने मुझे सिर्फ इतना कहा कि बेटा, कोई बात नहीं... चोट लगती रहती है, जबकि उनके सिर पर चार टांके लगे थे। आज सोशल मीडिया पर उन्हीं पुलिसवालों को अपराधी बताया जा रहा है, जो अपनी ड्यूटी निभा रहे थे।"

गमलों, पत्थरों और जूतों से हुआ हमला

दिल्ली पुलिस के एक एएसआई की पत्नी सीमा ने बताया कि उनके पति 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर ड्यूटी के लिए तैनात थे। दोपहर में उन्होंने फोन कर बताया था कि भीड़ लगातार बढ़ रही है और प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे हैं। शाम को जब उन्होंने दोबारा फोन किया तो पता चला कि उनके पति एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती हैं।

सीमा ने कहा कि भीड़ अचानक हिंसक हो गई और पुलिस बल पर पत्थर, गमले, जूते और चप्पलों से हमला किया गया। उनके पति का हेलमेट पूरी तरह टूट गया। उन्होंने कहा, अगर वह पत्थर सीधे सिर पर लग जाता तो शायद आज वह हमारे बीच नहीं होते।

'पुलिस का पक्ष भी संसद में रखा जाए'

घायल पुलिसकर्मी की पत्नी ने संसद और जनप्रतिनिधियों से अपील करते हुए कहा कि अब तक केवल प्रदर्शनकारियों का पक्ष सामने आया है, जबकि ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की पीड़ा पर कोई चर्चा नहीं हो रही। उन्होंने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च संस्था है और उसकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनका कहना था कि हिंसा के पूरे घटनाक्रम का केवल एक पक्ष सामने लाया जा रहा है, जबकि दूसरे पक्ष की वास्तविकता भी देश के सामने आनी चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट से भी लगाई गुहार

कुंजल ने बताया कि परिवार ने मामले में सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं के माध्यम से उनकी बात अदालत तक पहुंचाई गई, जहां उन्हें भरोसा दिलाया गया कि पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के अधिकारों की भी अनदेखी नहीं की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

दिल्ली के जंतर-मंतर में आयोजित प्रदर्शन के दौरान स्थिति अचानक हिंसक हो गई थी। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़प में 5 आईपीएस अधिकारियों समेत 180 पुलिसकर्मी घायल हुए थे, जबकि करीब 60 प्रदर्शनकारी भी जख्मी हुए। अब इस घटना के बाद पहली बार घायल पुलिसकर्मियों के परिजनों ने सामने आकर पूरे घटनाक्रम को लेकर अपनी बात रखी है और निष्पक्ष जांच के साथ न्याय की मांग की है।