यूक्रेन-रूस जंग में धाक दिखा चुकी Javelin मिसाइल अब आएगी भारत, 780 करोड़ की डील फाइनल
नई दिल्ली। भारत अपनी सैन्य क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। इसी कड़ी में अमेरिका ने भारत को दो बड़े रक्षा सौदों पर मुहर लगा दी है। अमेरिकी डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) ने जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम और एक्सकैलिबर आर्टिलरी प्रोजेक्टाइल की बिक्री को मंजूरी दे दी है। दोनों सौदों की कुल कीमत करीब 93 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 780 करोड़ रुपये) है।
जेवलिन मिसाइल
जेवलिन दुनिया की सबसे आधुनिक पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइलों में से एक है। इसे अमेरिकी कंपनियां लॉकहीड मार्टिन और रेटियॉन (RTX) मिलकर बनाती हैं। यह एक ‘फायर एंड फॉरगेट’ मिसाइल है, यानी एक बार लॉन्च करने के बाद इसे खुद ही टारगेट ढूंढ़कर हमला करना होता है, सैनिक को लगातार निशाना बनाए रखने की जरूरत नहीं पड़ती।
यूक्रेन-रूस युद्ध में जेवलिन ने रूसी टी-72, टी-80 और टी-90 जैसे भारी टैंकों को बड़ी आसानी से नष्ट किया है, जिसके बाद इसकी विश्व स्तर पर चर्चा हुई। अब भारतीय थल सेना को भी यह घातक हथियार मिलने जा रहा है।
एक्सकैलिबर प्रोजेक्टाइल
दूसरे सौदे में अमेरिका भारत को एक्सकैलिबर GPS-गाइडेड आर्टिलरी प्रोजेक्टाइल बेचेगा, जिसकी कीमत करीब 47.1 मिलियन डॉलर (लगभग 400 करोड़ रुपये) है। यह 155 mm का स्मार्ट गोला है जो 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक निशाना लगा सकता है। भारतीय सेना ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसका सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया था, जिसके बाद इसके और अधिग्रहण का फैसला लिया गया।
ये दोनों सौदे भारत की पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं पर तैनात सैन्य इकाइयों की मारक क्षमता में भारी इजाफा करेंगे। ब्रह्मोस मिसाइल निर्यात के साथ-साथ अमेरिका से आधुनिक हथियारों का आयात भारत को क्षेत्रीय स्तर पर और मजबूत रक्षा ताकत बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।