NEET पेपर लीक पर भड़के खान सर, बोले- 10 रुपये का डायपर लीक नहीं होता, NTA का पेपर हो जाता है...
May 12, 2026, 21:30 IST
NEET पेपर लीक मामले पर चर्चित शिक्षक Khan Sir की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इस घटना को लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
खान सर ने कहा कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि इससे देश की शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय छवि दोनों प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा, “2024 में भी इसी तरह पेपर लीक का मामला सामने आया था। सीबीआई जांच हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इससे दोषियों का मनोबल बढ़ गया और फिर वही घटना दोबारा हो गई।”
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “सबसे हास्यास्पद बात यह है कि किसी एजेंसी ने नहीं, बल्कि बच्चों ने सरकार को बताया कि पेपर लीक हुआ है। जिन एजेंसियों को परीक्षा की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें खुद पता नहीं चला। समझ नहीं आता कि एजेंसी को परीक्षा कराने के लिए रखा गया है या पेपर लीक कराने के लिए?”
“NTA नहीं, Never Trustable Agency”
NTA पर निशाना साधते हुए खान सर ने कहा, “NTA का मतलब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी नहीं, बल्कि Never Trustable Agency होना चाहिए। दस रुपये में मिलने वाला बच्चों का डायपर तक लीक नहीं होता, लेकिन इनका पेपर लीक हो जाता है।”
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी की मांग
उन्होंने कहा कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र और सख्त निगरानी में होनी चाहिए। खान सर बोले, “सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज को इस पूरे मामले का ऑब्जर्वर बनाया जाना चाहिए। एक तय समयसीमा के भीतर दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आज राजस्थान और केरल का नाम आ रहा है, कल किसी और राज्य का आएगा।”
प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
खान सर ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग भी की। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री को इस मामले में सीधे दखल देना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि दोषियों को सख्त सजा मिले। सुप्रीम कोर्ट को भी आगे आना चाहिए।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पेपर लीक के बाद परीक्षा एजेंसियां अगली परीक्षा को बेहद कठिन बना देती हैं। उन्होंने कहा, “2024 में पेपर लीक के बाद इतना कठिन पेपर बनाया गया कि बच्चों की हालत खराब हो गई। इतिहास गवाह है कि जब भी पेपर लीक होता है, अगली परीक्षा जरूरत से ज्यादा कठिन बना दी जाती है।”
“सीबीआई नोकिया मोबाइल की तरह है”
सीबीआई जांच पर भी खान सर ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “सीबीआई अब नोकिया मोबाइल की तरह हो गई है… था जब था। अगर यह मामला सिर्फ सीबीआई के भरोसे रहा तो बच्चों का MBBS पूरा हो जाएगा, लेकिन जांच खत्म नहीं होगी।”
खान सर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। छात्र और अभिभावक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
खान सर ने कहा कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं है, बल्कि इससे देश की शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्रीय छवि दोनों प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने कहा, “2024 में भी इसी तरह पेपर लीक का मामला सामने आया था। सीबीआई जांच हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। इससे दोषियों का मनोबल बढ़ गया और फिर वही घटना दोबारा हो गई।”
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “सबसे हास्यास्पद बात यह है कि किसी एजेंसी ने नहीं, बल्कि बच्चों ने सरकार को बताया कि पेपर लीक हुआ है। जिन एजेंसियों को परीक्षा की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें खुद पता नहीं चला। समझ नहीं आता कि एजेंसी को परीक्षा कराने के लिए रखा गया है या पेपर लीक कराने के लिए?”
“NTA नहीं, Never Trustable Agency”
NTA पर निशाना साधते हुए खान सर ने कहा, “NTA का मतलब नेशनल टेस्टिंग एजेंसी नहीं, बल्कि Never Trustable Agency होना चाहिए। दस रुपये में मिलने वाला बच्चों का डायपर तक लीक नहीं होता, लेकिन इनका पेपर लीक हो जाता है।”
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी की मांग
उन्होंने कहा कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र और सख्त निगरानी में होनी चाहिए। खान सर बोले, “सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज को इस पूरे मामले का ऑब्जर्वर बनाया जाना चाहिए। एक तय समयसीमा के भीतर दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आज राजस्थान और केरल का नाम आ रहा है, कल किसी और राज्य का आएगा।”
प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की अपील
खान सर ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग भी की। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री को इस मामले में सीधे दखल देना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि दोषियों को सख्त सजा मिले। सुप्रीम कोर्ट को भी आगे आना चाहिए।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पेपर लीक के बाद परीक्षा एजेंसियां अगली परीक्षा को बेहद कठिन बना देती हैं। उन्होंने कहा, “2024 में पेपर लीक के बाद इतना कठिन पेपर बनाया गया कि बच्चों की हालत खराब हो गई। इतिहास गवाह है कि जब भी पेपर लीक होता है, अगली परीक्षा जरूरत से ज्यादा कठिन बना दी जाती है।”
“सीबीआई नोकिया मोबाइल की तरह है”
सीबीआई जांच पर भी खान सर ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “सीबीआई अब नोकिया मोबाइल की तरह हो गई है… था जब था। अगर यह मामला सिर्फ सीबीआई के भरोसे रहा तो बच्चों का MBBS पूरा हो जाएगा, लेकिन जांच खत्म नहीं होगी।”
खान सर के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। छात्र और अभिभावक परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।