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अगर ट्रंप-मोदी-नेतन्याहू न हों तो... ट्रंप की करीबी  Laura Loomer का पाकिस्तान को लेकर बड़ा बयान 

ट्रंप समर्थक लॉरा लूमर ने पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि दुनिया में फैल रहे इस्लामिक आतंकवाद की जड़ पाकिस्तान है। लूमर ने भारत-अमेरिका-इजरायल सहयोग को मजबूत बताते हुए वैश्विक आतंकवाद से लड़ने के लिए संयुक्त रणनीति की जरूरत बताई।

 

Laura Loomer Statement on Pakistanअमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की करीबी सहयोगी और दक्षिणपंथी राजनीतिक कार्यकर्ता लॉरा लूमर ने पाकिस्तान को लेकर तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का दुनिया के लिए सबसे बड़ा “निर्यात” इस्लामिक आतंकवाद है और अमेरिका को पाकिस्तान की सरकार के साथ नजदीकियां नहीं बढ़ानी चाहिए।

India Today Conclave 2026 में बोलते हुए लूमर ने पाकिस्तान पर खुले तौर पर जिहाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में होने वाले कई आतंकी हमलों की कड़ियां अक्सर पाकिस्तान से जुड़ती दिखाई देती हैं।

दुनिया के कई आतंकी हमलों का लिंक पाकिस्तान से

लूमर ने कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो खुले तौर पर जिहादी और प्रो-शरिया विचारधारा को बढ़ावा देता है। उनके अनुसार वैश्विक स्तर पर होने वाले कई इस्लामिक आतंकवादी हमलों के पीछे किसी न किसी रूप में पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क का संबंध सामने आता है।

उन्होंने कहा, पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात इस्लामिक आतंकवाद है और मुझे नहीं लगता कि अमेरिका को पाकिस्तान की सरकार के साथ किसी तरह की नजदीकी बढ़ानी चाहिए।

ट्रंप पर हमले की साजिश का भी किया जिक्र

अपने आरोपों को मजबूत करने के लिए लूमर ने हाल ही में अमेरिकी अदालत में दोषी ठहराए गए पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट का उदाहरण दिया। मर्चेंट पर आरोप है कि उसने अमेरिका में लोगों की भर्ती कर डोनाल्ड ट्रंप और अन्य वरिष्ठ अमेरिकी नेताओं की हत्या की साजिश रची थी।

यह साजिश कथित तौर पर 2020 में ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या के जवाब में रची गई थी, जो ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान हुई थी। लूमर ने कहा कि यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि दुनिया में होने वाली अधिकांश आतंकवादी गतिविधियों की जड़ पाकिस्तान से जुड़ी हुई है।


भारत-अमेरिका-इजरायल की साझेदारी सबसे मजबूत

लूमर ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका, भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक साझेदारी दुनिया की सबसे मजबूत साझेदारियों में से एक है। उन्होंने दावा किया कि यदि डोनाल्ड ट्रंप, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जैसे नेताओं का नेतृत्व नहीं होता, तो दुनिया इस्लामिक आतंकवाद के खतरे के प्रति और अधिक असुरक्षित हो सकती थी।


भारत में हुए आतंकी हमलों का किया जिक्र

लूमर ने कहा कि भारत दशकों से आतंकवाद का सामना कर रहा है। उन्होंने 2008 के मुंबई हमले, 2019 के पुलवामा हमले और 2025 के पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए कहा कि ये घटनाएं कोई अपवाद नहीं हैं, बल्कि एक कठोर वास्तविकता को दर्शाती हैं।

उनके अनुसार इस विचारधारा ने न केवल भारत बल्कि अमेरिका समेत कई देशों में लोगों की जान ली है और कई समुदायों को प्रभावित किया है।


अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों पर भी उठे सवाल

लूमर के बयान ऐसे समय में आए हैं जब हाल के महीनों में अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में बदलाव देखा गया है। रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ संबंध बेहतर करने के लिए कई कदम उठाए हैं।

दोनों देशों के बीच क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े समझौते और 500 मिलियन डॉलर का क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ डील भी चर्चा में रहे हैं। इसके अलावा जून 2025 में ट्रंप ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ निजी मुलाकात भी की थी।

हालांकि लूमर ने कहा कि वह व्यक्तिगत तौर पर नहीं चाहतीं कि इस्लामिक नेताओं को व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया जाए, लेकिन एक राष्ट्रपति होने के नाते ट्रंप को वैश्विक कूटनीति निभानी पड़ती है।

इस्लामिक आतंकवाद अमेरिका और भारत का साझा दुश्मन

अपने संबोधन के अंत में लूमर ने कहा कि वैश्विक इस्लामिक आतंकवाद अमेरिका और भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उनके अनुसार यह एक ऐसा खतरा है, जिससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कॉरडिनेटेड रणनीति जरूरी है।