लक्षद्वीप में अब खुलेगी शराब की दुकान! 1979 का कानून खत्म, आखिर क्यों बदले गए नियम?
Lakshadweep Alcohol Ban Ended: भारत के मुस्लिम बहुल केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में शराब को लेकर दशकों पुराना कानून बदल दिया गया है। करीब 47 वर्षों तक लागू रहे शराब प्रतिबंध को समाप्त करते हुए केंद्र सरकार ने नया लक्षद्वीप एक्साइज रेगुलेशन-2026 लागू कर दिया है। इसके बाद पहली बार लाइसेंस प्राप्त दुकानों और संस्थानों के माध्यम से शराब की नियंत्रित बिक्री और उपभोग की अनुमति दी जाएगी।
यह फैसला सामने आते ही पूरे देश में चर्चा शुरू हो गई है। सवाल उठ रहा है कि जिस क्षेत्र में वर्षों से शराब प्रतिबंध लागू था, वहां अचानक नियमों में बदलाव क्यों किया गया? आइए समझते हैं पूरा मामला।
क्या बदला है नए कानून में?
5 जून 2026 से लागू हुए नए Lakshadweep Excise Regulation 2026 ने 1979 के पुराने प्रतिबंध कानून की जगह ले ली है। अब शराब के निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, खरीद, बिक्री और उपभोग को लाइसेंस व्यवस्था के तहत नियंत्रित किया जाएगा।
नए नियमों के तहत सरकारी एजेंसियों और अधिकृत संस्थानों को शराब आयात और खुदरा बिक्री का लाइसेंस भी दिया जा सकेगा। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह खुला बाजार नहीं होगा और प्रशासन के पास किसी भी समय नियंत्रण या प्रतिबंध लगाने का अधिकार रहेगा।
क्या अब हर कोई शराब खरीद सकेगा?
नहीं, नए नियमों में कई शर्तें रखी गई हैं।
- 21 वर्ष से कम उम्र के लोगों को शराब नहीं बेची जाएगी।
- खरीद और भंडारण की सीमा तय की जा सकती है।
- प्रशासन आवश्यकता पड़ने पर किसी क्षेत्र में फिर से प्रतिबंध लागू कर सकता है।
- शराब की बिक्री केवल लाइसेंस प्राप्त व्यवस्था के तहत होगी।
लक्षद्वीप में शराब पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया था?
लक्षद्वीप की लगभग 97 प्रतिशत आबादी मुस्लिम समुदाय से जुड़ी है। इस कारण 1979 में शराब बिक्री और उपभोग पर व्यापक प्रतिबंध लगाया गया था। यह प्रतिबंध स्थानीय सामाजिक और धार्मिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लागू किया गया था।
हालांकि प्रतिबंध पूरी तरह से पूर्ण नहीं था। कुछ सरकारी बार और पर्यटन केंद्रों, खासकर बंगाराम और कवरत्ती द्वीप पर सीमित छूट पहले से मौजूद थी।
आखिर सरकार ने नियम क्यों बदले?
विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे सबसे बड़ा कारण पर्यटन विकास है।
केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से लक्षद्वीप को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की कोशिश कर रही है। सरकार का मानना है कि शराब प्रतिबंध के कारण लक्षद्वीप की प्रतिस्पर्धा मालदीव जैसे पर्यटन स्थलों से कमजोर पड़ रही थी, जहां पर्यटकों को ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
पीएम मोदी की यात्रा के बाद बढ़ा पर्यटन
जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षद्वीप का दौरा किया था। उनकी यात्रा के बाद लक्षद्वीप पर्यटन को लेकर देश और दुनिया में चर्चा बढ़ी।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में जहां केवल 3,875 पर्यटक पहुंचे थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 68,328 तक पहुंच गई। यानी पर्यटन में लगभग 47 प्रतिशत से अधिक की तेज वृद्धि दर्ज की गई।
सरकार का मानना है कि पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए नियंत्रित शराब व्यवस्था जरूरी है।
क्या इस फैसले का विरोध भी हुआ?
हाँ, लक्षद्वीप में शराब उपलब्धता बढ़ाने के प्रस्तावों का पहले भी कई बार विरोध हुआ है। स्थानीय राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और कई नागरिक समूहों ने आशंका जताई थी कि इससे सामाजिक समस्याएं, नशे की प्रवृत्ति और कानून-व्यवस्था की चुनौतियां बढ़ सकती हैं। इसके बावजूद प्रशासन चरणबद्ध तरीके से नियंत्रित शराब नीति लागू करने की दिशा में आगे बढ़ता रहा।
शराब पर कितना टैक्स लगाया गया है?
सरकार ने शराब बिक्री की अनुमति तो दी है, लेकिन उस पर भारी कर भी लगाया है।
- IMFL और विदेशी शराब पर 400% एक्साइज ड्यूटी
- बीयर पर 200% ड्यूटी
- वाइन पर 80% ड्यूटी
इससे साफ है कि सरकार शराब की बिक्री को नियंत्रित और सीमित रखना चाहती है।
लक्षद्वीप में कौन-कौन से द्वीप हैं?
लक्षद्वीप में कुल 36 द्वीप हैं, जिनमें से 10 आबाद हैं। प्रमुख द्वीपों में कवरत्ती, अगत्ती, मिनिकॉय, कदमत, अंद्रोट, कल्पेनी और अमीनी शामिल हैं। विदेशी पर्यटकों को विशेष अनुमति के साथ सीमित द्वीपों पर ही जाने की अनुमति दी जाती है।
क्या यह फैसला लक्षद्वीप की तस्वीर बदल देगा?
यह बदलाव केवल शराब बिक्री तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे लक्षद्वीप को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। समर्थकों का दावा है कि इससे निवेश, रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जबकि विरोधियों को सामाजिक प्रभावों की चिंता है। आने वाले सालों में यह स्पष्ट होगा कि 47 साल पुराने प्रतिबंध को खत्म करने का यह फैसला लक्षद्वीप के विकास में कितना बड़ा मोड़ साबित होता है।