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लोकसभा में आईबीसी संशोधन विधेयक पारित, दिवालिया प्रक्रिया होगी तेज और पारदर्शी
 

 

नई दिल्ली। लोकसभा ने सोमवार को दिवालिया एवं शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) में व्यापक संशोधन वाला विधेयक पारित कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य दिवालिया प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। इसमें समयबद्ध समाधान, अदालत के बाहर समझौते का विकल्प और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिवालिया प्रक्रिया को लागू करने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।

वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2016 में लागू आईबीसी ने देश के बैंकिंग क्षेत्र को मजबूती प्रदान की है। उन्होंने बताया कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने विभिन्न माध्यमों से 1,04,099 करोड़ रुपये की वसूली की है, जिसमें से 54,528 करोड़ रुपये (52.3 प्रतिशत) आईबीसी के जरिए प्राप्त हुए हैं।

नए संशोधनों के तहत हर दिवालिया प्रक्रिया को निश्चित समय सीमा में पूरा करना अनिवार्य होगा। साथ ही छोटे और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को भी कानून की मुख्यधारा में शामिल किया जाएगा, जिससे उनके वित्तीय विवादों का तेजी से समाधान हो सके। सरकार ने आईबीसी, 2016 में कुल 12 संशोधन प्रस्तावित किए हैं, जिनका उद्देश्य हितधारकों का मूल्य अधिकतम करना और प्रक्रियागत चुनौतियों को दूर करना है।

वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि अत्यधिक मुकदमेबाजी के कारण होने वाली देरी को रोकने के लिए नए प्रावधान किए गए हैं। अब दिवालिया मामलों में आवेदन को 14 दिनों के भीतर स्वीकार या अस्वीकार करना होगा, जबकि अपीलों का निपटारा तीन महीने के भीतर किया जाएगा। इसके अलावा दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर एक लाख से दो करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।

विधेयक में एमएसएमई के लिए विशेष रियायतें भी दी गई हैं। उन्हें धारा 29ए के कुछ प्रावधानों से छूट दी गई है, जिससे मौजूदा प्रमोटर अपने व्यवसाय को बचाने में भाग ले सकें। साथ ही प्री-पैकेज्ड इंसाल्वेंसी रिजॉल्यूशन प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए दस्तावेजी प्रक्रियाओं को कम किया गया है।

गौरतलब है कि इस विधेयक का मसौदा 12 अगस्त 2025 को लोकसभा में पेश किया गया था और बाद में इसे प्रवर समिति को भेजा गया था। समिति ने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसकी सभी सिफारिशों को सरकार ने स्वीकार कर लिया। अब यह विधेयक राज्यसभा में विचार के लिए भेजा जाएगा।

इस बीच, निर्मला सीतारमण ने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को मजबूत बताते हुए कहा कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले “बिल्कुल ठीक” स्थिति में है, हालांकि हाल ही में इसमें कुछ गिरावट दर्ज की गई है।