माघ मेले में महंत बनाम सरकार! शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का धरना, प्रशासन ने भेजा नोटिस
Prayagraj : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या पर स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और स्थानीय प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया है। विवाद के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 18 जनवरी से अपने आश्रम के बाहर धरने पर बैठे हुए हैं। वहीं, सोमवार रात मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा कि वे स्वयं को शंकराचार्य कैसे लिख रहे हैं। इसके जवाब में मंगलवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा।
मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित – अविमुक्तेश्वरानंद
प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने कहा कि यह मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रयागराज मेला प्राधिकरण जानबूझकर उन्हें अपमानित कर रहा है और यह एक सोची-समझी साजिश है। उन्होंने प्रशासन को कानूनी नोटिस भेजने की बात भी कही।
मेला प्रशासन पर गंभीर आरोप
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि सोमवार देर रात प्रशासनिक अधिकारी उनके शिविर में पहुंचे और नोटिस चस्पा कर चले गए। उन्होंने बताया कि उन्होंने अधिकारियों से सुबह आने को कहा था, लेकिन उन्होंने इसे अनदेखा किया।
उन्होंने कहा कि नोटिस में मुझसे पूछा गया है कि मैंने अपने नाम के आगे ‘शंकराचार्य’ कैसे लगाया। यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश इसका आधार है। मेरे वकील पीएन मिश्रा इस पर कानूनी जवाब देंगे।
वकील का दावा – फर्जी हलफनामा दाखिल हुआ
अधिवक्ता पीएन मिश्रा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में पहले ही यह मामला लंबित है। उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट में फर्जी हलफनामा दाखिल कर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को अयोग्य घोषित करने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि माघ मेले में करीब 15 अन्य शंकराचार्य मौजूद हैं, जिन्हें सभी सुविधाएं दी जा रही हैं, लेकिन केवल अविमुक्तेश्वरानंद को निशाना बनाया जा रहा है।
2022 में हुआ था पट्टा अभिषेक
पीएन मिश्रा ने बताया कि 12 सितंबर 2022 को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का पट्टा अभिषेक हो चुका है और उन्हें विधिवत चादर और तिलक प्रदान किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि 2023 में उन्होंने शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जो अभी विचाराधीन है।
गौ हत्या के विरोध की वजह से नोटिस?
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि उन्हें यह नोटिस इसलिए दिया गया क्योंकि वे गौ हत्या पर प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया जा रहा है, उसमें कहीं भी यह नहीं लिखा है कि वे स्वयं को शंकराचार्य नहीं लिख सकते। उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन की नोटिस के खिलाफ वे कानूनी कार्रवाई करेंगे और अपनी ओर से भी प्रशासन को नोटिस भेजेंगे।