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Malegaon Blast Case: 37 मौतें, 17 साल और आखिर में… कोई दोषी नहीं! कोर्ट का चौंकाने वाला फैसला

मालेगांव 2006 बम धमाका मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। 37 लोगों की मौत वाले इस केस में सबूतों की कमी को आधार बनाया गया। इससे पहले NIA कोर्ट भी 2008 मामले में आरोपियों को बरी कर चुकी है।
 

Malegaon Blast Case: महाराष्ट्र के मालेगांव में वर्ष 2006 में हुए चर्चित बम धमाका मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान लोकेश शर्मा, धन सिंह, राजेंद्र चौधरी और मनोहर नरवरिया को निर्दोष माना और उनके खिलाफ लगे सभी आरोप खारिज कर दिए। इस धमाके में 37 लोगों की मौत हुई थी, जिससे पूरे देश में सनसनी फैल गई थी।

सबूतों के अभाव में आरोपियों को राहत

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्य दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, जिसके आधार पर सभी आरोपियों को बरी किया गया।

पहले भी NIA कोर्ट दे चुकी है राहत

इससे पहले 2008 के मालेगांव बम धमाका मामले में विशेष NIA अदालत भी सभी सात आरोपियों को बरी कर चुकी है। इन आरोपियों में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, मेजर (रिटायर्ड) रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्विवेदी और समीर कुलकर्णी शामिल थे। NIA कोर्ट ने भी अपने फैसले में सबूतों की कमी का हवाला देते हुए UAPA, शस्त्र अधिनियम और IPC के तहत लगे सभी आरोप हटा दिए थे।

क्या था मालेगांव धमाका मामला

मालेगांव में 29 सितंबर 2008 को नासिक जिले के भिक्कू चौक मस्जिद के पास एक मोटरसाइकिल में लगाए गए बम में विस्फोट हुआ था। यह धमाका रमजान के दौरान और नवरात्रि से ठीक पहले हुआ, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई थी। इस घटना में कई लोगों की जान गई और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे।

जांच और ट्रायल के दौरान क्या हुआ

इस मामले की शुरुआती जांच महाराष्ट्र एटीएस ने की थी, जिसने आरोपियों को गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल की। बाद में 2011 में जांच NIA को सौंप दी गई। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 323 गवाह पेश किए, लेकिन उनमें से 34 गवाह अपने बयान से मुकर गए, जिससे केस कमजोर पड़ गया।