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Meta AI बना हैकर्स का हथियार! Instagram के हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स किए हैक

 
सोशल मीडिया दिग्गज Meta द्वारा अपने सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म्स में Meta AI को इंटीग्रेट करने के बाद एक गंभीर सुरक्षा खामी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हैकर्स ने Meta AI की एक कमजोरी का फायदा उठाकर Instagram के कई हाई-प्रोफाइल अकाउंट्स तक पहुंच बना ली। प्रभावित खातों में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति कार्यालय से जुड़ा व्हाइट हाउस का आधिकारिक हैंडल और अमेरिकी स्पेस फोर्स के एक वरिष्ठ अधिकारी का अकाउंट भी शामिल बताया गया है।

कैसे सामने आया मामला?

साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स Dark Web Informer और ZachXBT ने सबसे पहले इस खामी का खुलासा किया। इसके बाद टेलीग्राम, एक्स और रेडिट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर कई यूजर्स ने अपने अकाउंट्स के टेकओवर होने की शिकायतें दर्ज कराईं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हैकर्स ने Meta AI की मदद से पासवर्ड रीसेट प्रक्रिया को प्रभावित किया और अपने नियंत्रण वाले ईमेल एड्रेस पर वेरिफिकेशन कोड प्राप्त कर अकाउंट्स तक पहुंच बना ली।

Meta AI को कैसे किया गया गुमराह?

हैरानी की बात यह है कि इस हमले में किसी मालवेयर, वायरस या फिशिंग लिंक का इस्तेमाल नहीं किया गया। हैकर्स ने पहले VPN की मदद से अपनी लोकेशन को टारगेट यूजर की लोकेशन जैसा दिखाया। इसके बाद Instagram के "Forgot Password" विकल्प का उपयोग किया गया।

यहीं से उन्हें Meta AI सपोर्ट चैट तक पहुंच मिली। AI चैटबॉट के साथ बातचीत के दौरान विशेष रूप से तैयार किए गए प्रॉम्प्ट्स का इस्तेमाल कर हैकर्स ने पीड़ित अकाउंट में नया ईमेल एड्रेस जोड़ने का अनुरोध किया। एक बार नया ईमेल जुड़ने के बाद वेरिफिकेशन कोड उसी ईमेल पर पहुंच गया, जिससे अकाउंट का नियंत्रण हैकर्स के हाथ में चला गया।

Meta ने किया सुरक्षा खामी दूर करने का दावा

मामला सामने आने के बाद Meta ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस सुरक्षा खामी को ठीक करने का दावा किया है। कंपनी के एक प्रवक्ता ने बताया कि प्रभावित अकाउंट्स को सुरक्षित किया जा रहा है और संबंधित तकनीकी समस्या को दूर कर दिया गया है।

हालांकि Meta ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इस खामी का फायदा उठाकर कुल कितने अकाउंट्स को निशाना बनाया गया था।

यूजर्स के लिए क्या है सलाह?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि Instagram और अन्य Meta प्लेटफॉर्म्स के यूजर्स को टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) सक्रिय रखना चाहिए। साथ ही अकाउंट से जुड़े ईमेल और फोन नंबर की नियमित जांच करते रहना चाहिए, ताकि किसी भी अनधिकृत बदलाव का तुरंत पता चल सके।

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम जितने उपयोगी हैं, उतना ही जरूरी उनकी सुरक्षा को लगातार मजबूत बनाए रखना भी है।