CJP प्रोटेस्ट में विदेशी फंडिंग के दावे पर विदेश मंत्रालय की सफाई, MEA ने बताई वायरल पोस्ट की सच्चाई
CJP विरोध प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे विदेशी फंडिंग से जुड़े दावों पर विदेश मंत्रालय (MEA) ने सफाई जारी की है। मंत्रालय ने ऐसे पोस्ट को भ्रामक बताते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया।
विदेश मंत्रालय की फैक्ट चेक यूनिट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बताया कि वायरल दावा वास्तविक बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करता है। मंत्रालय ने कहा कि प्रवक्ता के बयान को ऐसे संदर्भ में दिखाया गया, जो उन्होंने दिया ही नहीं था।
क्या था पूरा मामला?
दरअसल, करीब दो हफ्ते पहले विदेश मंत्रालय की मीडिया ब्रीफिंग के दौरान प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से CJP विरोध प्रदर्शन की फंडिंग को लेकर सवाल पूछा गया था। इसके बाद उनके जवाब को सोशल मीडिया पर अलग अर्थ के साथ साझा किया जाने लगा।
MEA ने स्पष्ट किया कि उस समय प्रवक्ता ने विदेशी फंडिंग से जुड़े आरोपों पर कोई पुष्टि नहीं की थी, बल्कि उन्होंने कहा था कि इस मामले में उनके पास साझा करने के लिए कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।
रणधीर जायसवाल ने क्या कहा था?
रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा था कि उनसे कई बार CJP विरोध प्रदर्शन की फंडिंग को लेकर सवाल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि उस समय उनके पास इस विषय से जुड़ी कोई ऐसी जानकारी नहीं थी, जिसे सार्वजनिक किया जा सके।
विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि वायरल पोस्ट में प्रवक्ता के बयान को गलत तरीके से पेश किया गया और ऐसा बयान उनसे जोड़ दिया गया, जो उन्होंने दिया ही नहीं था।
MEA ने किया दावा साफ
विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि आधिकारिक रूप से उस समय केवल इतना ही जवाब दिया गया था कि मामले से जुड़ी कोई जानकारी साझा करने के लिए उपलब्ध नहीं है। मंत्रालय ने लोगों से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ऐसी सूचनाओं को बिना जांचे-परखे आगे न बढ़ाने की अपील की है।
The post is misleading and misrepresents the statement of the Spokesperson.
— MEA FactCheck (@MEAFactCheck) July 26, 2026
At the BiWeekly briefing on Friday, the Spokesperson stated the following " Madhu, regarding the point you raised about allegations of foreign funding and other such claims in connection with the… pic.twitter.com/oZsc5fb9oz
इस मामले में अब MEA की सफाई के बाद सोशल मीडिया पर चल रहे विदेशी फंडिंग के दावों पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।