{"vars":{"id": "130921:5012"}}

बाढ़ राहत कार्यों में विदेशी मदद न लेने पर नेपाल का यू-टर्न, अब भारत-चीन की टीमें करेंगी रेस्क्यू, 1,924 लोग लापता

नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद सरकार ने विदेशी मदद नहीं लेने का फैसला पलट दिया है। अब भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमें रेस्क्यू अभियान में मदद करेंगी। बाढ़ में 550 से ज्यादा लोगों की मौत और 1,924 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
 

Nepal Flash Flood Update: नेपाल ने भीषण फ्लैश फ्लड के बाद विदेशी मदद नहीं लेने के अपने फैसले को पलट दिया है। अब भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया की विशेषज्ञ टीमें नेपाल में राहत और बचाव अभियान में मदद करेंगी। इन टीमों को खास तौर पर सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश, डीएनए जांच और फॉरेंसिक पहचान जैसे कामों में लगाया जाएगा।

नेपाल सरकार ने बुधवार को कहा था कि देश की अपनी बचाव टीमें अभियान संभालने में सक्षम हैं और विदेशी रेस्क्यू टीमों की जरूरत नहीं है। हालांकि, कई देशों के नागरिकों के लापता होने और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद नेपाल ने सीमित विदेशी विशेषज्ञों को बुलाने की मंजूरी दे दी।

550 से ज्यादा मौतें, करीब 2 हजार लोग अब भी लापता

भोतेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। शुक्रवार तक 550 से ज्यादा लोगों की मौत की जानकारी सामने आई, जबकि 1,924 लोग अब भी लापता बताए गए हैं।

नेपाल पर्यटन बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक लापता विदेशी नागरिकों में भारतीयों की संख्या सबसे ज्यादा है। करीब 288 भारतीय नागरिक लापता बताए गए हैं। इसके अलावा 100 चीनी, 65 अमेरिकी, 53 यूक्रेनी, 35 ऑस्ट्रेलियाई और 33 ब्रिटिश नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी है।

पावर प्रोजेक्ट में 576 लोग लापता

बाढ़ से प्रभावित अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। 216 मेगावाट की इस परियोजना में काम कर रहे 576 लोग अब तक संपर्क में नहीं आए हैं। हादसे के वक्त परियोजना में करीब 1,350 लोग काम कर रहे थे।

बाढ़ और भूस्खलन से सड़कें क्षतिग्रस्त होने के साथ मोबाइल और टेलीफोन नेटवर्क भी प्रभावित हुए हैं। इससे राहत टीमों को प्रभावित हाइड्रोपावर साइट तक पहुंचने और लापता लोगों की जानकारी जुटाने में परेशानी हो रही है।

भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ

भारत ने नेपाल को सुरंग बचाव दल, मेडिकल टीम और NDRF personnel उपलब्ध कराने की पेशकश की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी नेपाल के विदेश मंत्री से बात कर भारत की मदद का भरोसा दिया।

भारत की ओर से राहत सामग्री की तीसरी खेप में 10 टन सामान भेजा गया, जिसमें पोर्टेबल जनरेटर, भोजन, पानी शुद्ध करने वाली गोलियां और अन्य जरूरी सामग्री शामिल है। इसके साथ डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और टनल रेस्क्यू विशेषज्ञों की 11 सदस्यीय टीम भी नेपाल पहुंच चुकी है।

किन कामों में मदद करेंगी विदेशी टीमें?

भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञों को मुख्य रूप से हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में रेस्क्यू, डीएनए टेस्ट और शवों की फॉरेंसिक पहचान में लगाया जाएगा।

नेपाल के पास बड़ी संख्या में डीएनए सैंपल की जांच करने की सीमित क्षमता है। ऐसे में विदेशी विशेषज्ञ लापता लोगों की पहचान में मदद करेंगे, ताकि शवों को जल्द से जल्द उनके परिवारों को सौंपा जा सके। रसुवा और नुवाकोट में बाढ़ से प्रभावित 14 हाइड्रोपावर परियोजनाओं पर विदेशी टीमें विशेष रूप से ध्यान देंगी।

दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया ने भी अपने नौ नागरिकों के संपर्क से बाहर होने के बाद रेस्क्यू टीम भेजने की तैयारी की है। नेपाल में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन खराब मौसम, क्षतिग्रस्त सड़कों और संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं।