लॉ की पढ़ाई के लिए अब उम्र की कोई सीमा नहीं, BCI का बड़ा फैसला; 3 और 5 साल के LLB कोर्स में हर उम्र के उम्मीदवार ले सकेंगे दाखिला
नई दिल्ली। कानून की पढ़ाई करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए बड़ी राहत की खबर है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने तीन वर्षीय एलएलबी और पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में दाखिले के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा हटाने का फैसला किया है। शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को बीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दी। इस फैसले के बाद अब किसी भी उम्र के उम्मीदवार निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और प्रवेश संबंधी अन्य शर्तें पूरी करने पर कानून की पढ़ाई कर सकेंगे।
बीसीआई की जनरल काउंसिल ने विचार-विमर्श के बाद उम्र संबंधी प्रतिबंध समाप्त करने का प्रस्ताव पारित किया है। परिषद का मानना है कि कानूनी शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए शैक्षणिक योग्यता, उपस्थिति, परीक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी मौजूदा व्यवस्थाएं पर्याप्त हैं। केवल उम्र के आधार पर योग्य उम्मीदवारों को कानून की पढ़ाई से वंचित करना उचित नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने किया याचिका का निपटारा
इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ कर रही थी। सुनवाई के दौरान बीसीआई की ओर से अधिवक्ता राधिका गौतम ने अदालत को बताया कि परिषद ने तीन और पांच साल के लॉ कोर्स में प्रवेश के लिए अधिकतम आयु सीमा समाप्त करने का निर्णय लिया है।
बीसीआई के इस फैसले को संज्ञान में लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ऋषभ दुग्गल की याचिका का निपटारा कर दिया। अदालत ने माना कि उम्र संबंधी प्रतिबंध वापस लिए जाने के बाद याचिका पर आगे सुनवाई की आवश्यकता नहीं रह गई है।
पहले कितनी थी उम्र की सीमा?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पुराने नियमों के अनुसार, पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए अधिकतम उम्र 20 वर्ष निर्धारित थी। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों के लिए यह सीमा 22 वर्ष थी।
वहीं, तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स में भी अधिकतम आयु संबंधी प्रतिबंध लागू किए गए थे। मार्च 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने उम्र सीमा निर्धारित करने वाले बीसीआई के फैसले पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में लंबित था।
2016 के सर्कुलर को दी गई थी चुनौती
इस विवाद की शुरुआत बीसीआई के वर्ष 2016 में जारी सर्कुलर से हुई थी। इसके माध्यम से कानूनी शिक्षा नियम, 2008 की अनुसूची-तीन के क्लॉज 28 को दोबारा लागू किया गया था। इस प्रावधान में लॉ कोर्स में प्रवेश के लिए अधिकतम आयु सीमा तय की गई थी।
ऋषभ दुग्गल ने इस सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में उम्र के आधार पर प्रवेश प्रतिबंध को संवैधानिक अधिकारों के विरुद्ध बताया गया था।
इससे पहले वर्ष 2013 में भी बीसीआई ने संबंधित आयु प्रतिबंध वापस लिया था, लेकिन सितंबर 2016 में इसे फिर लागू कर दिया गया। इसके बाद विभिन्न अदालतों में इसकी वैधता को लेकर कानूनी विवाद जारी रहा।
बीसीआई ने 5 नवंबर को लिया अंतिम फैसला
25 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई से पूछा था कि क्या वह पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में अधिकतम आयु सीमा हटाने के लिए तैयार है।
इसके बाद बीसीआई की जनरल काउंसिल ने 5 नवंबर 2026 को उम्र संबंधी प्रतिबंध वापस लेने का प्रस्ताव पारित किया। अगले दिन सुप्रीम कोर्ट को इस निर्णय से अवगत कराया गया। बीसीआई ने इस फैसले को सोच-समझकर लिया गया अंतिम निर्णय बताया है।
उम्र अधिक होने के कारण पढ़ाई नहीं कर पाने वालों को राहत
बीसीआई का यह निर्णय उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो नौकरी, पारिवारिक जिम्मेदारियों या अन्य कारणों से कम उम्र में कानून की पढ़ाई शुरू नहीं कर पाए थे।
अब ऐसे उम्मीदवार भी तीन वर्षीय एलएलबी या पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड लॉ कोर्स में दाखिले के लिए आवेदन कर सकेंगे। हालांकि, अधिकतम उम्र की सीमा हटने का मतलब बिना योग्यता के प्रवेश मिलना नहीं है। उम्मीदवारों को संबंधित विश्वविद्यालय और संस्थान की शैक्षणिक योग्यता, प्रवेश परीक्षा तथा अन्य निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा।