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अब जूनियर वकील लड़ेंगे केस! गर्मियों की छुट्टियों में सीनियर वकीलों की एंट्री बंद

 

New Delhi : सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने गर्मियों की छुट्टियों के दौरान होने वाली सुनवाई को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 1 जून से 12 जुलाई तक चलने वाले आंशिक न्यायालय कार्य दिवसों के दौरान उनकी बेंच के समक्ष न तो सीनियर एडवोकेट मामलों की लिस्टिंग के लिए उल्लेख कर सकेंगे और न ही दलीलें रख पाएंगे। इस अवधि में केवल युवा वकीलों और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) को ही बहस करने का अवसर दिया जाएगा।

सोमवार को सुनवाई शुरू होते ही जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, “मेरी अदालत में किसी वरिष्ठ अधिवक्ता को अनुमति नहीं दी जाएगी।” उन्होंने Justice P. B. Varale के साथ गठित बेंच की अध्यक्षता करते हुए यह घोषणा की।

युवा वकीलों को मिलेगा मंच

सुनवाई के दौरान जब एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने मामले का उल्लेख करने की कोशिश की, तो जस्टिस विक्रम नाथ ने साफ कर दिया कि छुट्टियों के दौरान उनकी अदालत में केवल एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड या निर्देश देने वाले वकील ही पक्ष रख सकेंगे। उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ वकील उपस्थित हैं, तो संबंधित AOR या जूनियर वकील को बहस के लिए आगे आना होगा।

एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह कहते हुए छूट मांगी कि उन्हें इस व्यवस्था की जानकारी नहीं थी, लेकिन अदालत ने अनुरोध अस्वीकार करते हुए कहा कि वह केवल जूनियर वकीलों को ही सुनेंगे।

जुलाई तक टलेंगे कई मामले

बेंच ने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में वरिष्ठ अधिवक्ता पेश हो रहे हैं, उन्हें खारिज नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों को नियमित न्यायिक कार्य शुरू होने के बाद जुलाई में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

इसी तरह की व्यवस्था जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की बेंच ने भी अपनाई है। जस्टिस नरसिम्हा ने वकीलों से कहा कि अगले दिन से वरिष्ठ अधिवक्ताओं को न तो मामलों का उल्लेख करने और न ही दलीलें रखने की अनुमति दी जाएगी।

उन्होंने हल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा, “अगर कनिष्ठ वकील बहस करेंगे तो नोटिस जारी होने की संभावना अधिक होगी, जबकि वरिष्ठ वकीलों की बहस पर मामला खारिज होने की संभावना ज्यादा रहती है।”

अन्य बेंचों ने भी अपनाया वही रुख

जस्टिस संजय करोल ने भी इसी प्रकार की व्यवस्था लागू की। उन्होंने जस्टिस ए.जी. मसीह के साथ गठित बेंच की अध्यक्षता करते हुए कहा कि छुट्टियों के दौरान युवा वकीलों को आगे आने का अवसर दिया जाएगा।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में ग्रीष्मावकाश को अब “आंशिक न्यायालय कार्य दिवस” कहा जाता है। इस दौरान हर सप्ताह तीन से चार बेंचें महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करती हैं। अदालत की इस पहल को युवा अधिवक्ताओं को अधिक अवसर देने और उनकी न्यायालयी दक्षता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।