अब आम नागरिक भी बन सकेंगे अंतरिक्ष यात्री: इसरो का बड़ा फैसला, गगनयान मिशन से खुलेगा नया रास्ता
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अब अपने एस्ट्रोनॉट दल में आम नागरिकों को शामिल करने जा रहा है। अब तक अंतरिक्ष यात्रियों के चयन में मुख्य रूप से वायुसेना के टेस्ट पायलटों को प्राथमिकता दी जाती थी, लेकिन अब वैज्ञानिक और तकनीकी पृष्ठभूमि वाले नागरिकों के लिए भी दरवाजे खुलेंगे। यह फैसला भारत के भविष्य के मानव अंतरिक्ष मिशनों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
क्या है गगनयान मिशन?
गगनयान मिशन भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन है। इसके तहत तीन अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊंचाई की कक्षा में भेजा जाएगा। यह मिशन लगभग तीन दिन का होगा, जिसके बाद क्रू को सुरक्षित भारतीय समुद्री क्षेत्र में उतारा जाएगा।
यह मिशन भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल करेगा, जिन्होंने अपने दम पर इंसानों को अंतरिक्ष में भेजा है।
दूसरी टीम में 10 एस्ट्रोनॉट
इसरो की एस्ट्रोनॉट चयन और प्रबंधन समिति ने दूसरे बैच में 10 अंतरिक्ष यात्रियों को शामिल करने की सिफारिश की है:
- 6 सदस्य सैन्य विमानन पृष्ठभूमि से होंगे
- 4 सदस्य नागरिक विशेषज्ञ होंगे (STEM क्षेत्र से)
पहले बैच में सभी थे वायुसेना अधिकारी
पहले बैच में चुने गए चारों अंतरिक्ष यात्री भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट हैं:
- प्रशांत बी नायर
- शुभांशु शुक्ला
- अजीत कृष्णन
- अंगद प्रताप
इनका चयन इसलिए किया गया था क्योंकि शुरुआती मिशनों में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।
हेलिकॉप्टर पायलटों को भी मौका
दूसरे बैच में फाइटर पायलटों के साथ-साथ कॉम्बैट हेलिकॉप्टर पायलटों को भी शामिल किया जा सकता है, जिससे चयन प्रक्रिया और व्यापक होगी।
नागरिक कब जाएंगे अंतरिक्ष?
हालांकि नागरिकों का चयन दूसरे बैच में होगा, लेकिन उन्हें चौथे गगनयान मिशन से अंतरिक्ष यात्रा का मौका मिलने की संभावना है। शुरुआती मिशनों में अभी भी अनुभवी सैन्य पायलटों को प्राथमिकता दी जाएगी।
भारत के स्पेस स्टेशन की तैयारी
यह बदलाव सिर्फ गगनयान तक सीमित नहीं है। इसरो भविष्य में नियमित मानव मिशन, अंतरिक्ष में वैज्ञानिक शोध और भारत के प्रस्तावित स्पेस स्टेशन के निर्माण की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए एक स्थायी एस्ट्रोनॉट कैडर तैयार किया जा रहा है।
तीसरे बैच में बढ़ेगी नागरिकों की संख्या
- तीसरे बैच में 12 अंतरिक्ष यात्री होंगे
- 2 मिशन पायलट
- 10 नागरिक विशेषज्ञ
- भविष्य में कुल 40 एस्ट्रोनॉट्स का कैडर बनाने की योजना
4.5 साल की होगी ट्रेनिंग
एक अंतरिक्ष यात्री को चयन से लेकर मिशन के लिए तैयार करने तक करीब 4.5 साल का समय लगता है। फिलहाल इसरो के पास अस्थायी ट्रेनिंग सुविधा है और जल्द ही एक पूर्ण विकसित एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किया जा सकता है।