{"vars":{"id": "130921:5012"}}

77वें गणतंत्र दिवस पर भारत ने दिखाई सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय एकता, ऑपरेशन सिंदूर की झांकी रही मुख्य आकर्षण
 

 

नई दिल्ली: भारत ने आज सोमवार को अपने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर भव्य परेड के साथ उत्सव मनाया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य अतिथि के रूप में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ परेड की समीक्षा की। इस अवसर पर सैन्य शक्ति का प्रदर्शन, स्वदेशी हथियार प्रणालियां और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को विशेष रूप से उजागर किया गया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह पावन पर्व हमें अतीत, वर्तमान और भविष्य में देश की दशा-दिशा का अवलोकन करने का अवसर देता है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के बल पर 15 अगस्त 1947 को प्राप्त आजादी का जिक्र करते हुए कहा कि हम अपनी राष्ट्रीय नियति के निर्माता बन गए हैं। राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय एकता के प्रयासों की सराहना की और वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के समारोहों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह गीत भारत माता के दिव्य स्वरूप की आराधना है, जो प्रत्येक भारतीय के मन में देशभक्ति की भावना जागृत करता है।

परेड में भारतीय सेनाओं की एकजुटता और आधुनिक हथियारों का शानदार प्रदर्शन देखने को मिला। ऑपरेशन सिंदूर की झांकी मुख्य आकर्षण रही, जिसमें 1965, 1971 और 1999 के युद्ध सामग्री के साथ इंटीग्रेटेड ऑपरेशनल सेंटर का प्रदर्शन किया गया। तीनों सेनाओं के समन्वय को दर्शाते हुए यह झांकी निकाली गई।

स्वदेशी हथियार प्रणालियों में सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर ने अपनी लंबी रेंज और मारक क्षमता से सबका ध्यान खींचा। परेड में शक्तिबान, दिव्यास्त्र, हाई मोबिलिटी व्हीकल्स (HMV 6x6), धनुष गन सिस्टम, अमोघ एडवांस्ड टोएड आर्टिलरी गन सिस्टम (ATAGS) और सुपरसोनिक ब्रह्मोस वेपन सिस्टम का भी प्रदर्शन हुआ।

हेलीकॉप्टर ध्रुव के जरिए प्रहार फॉर्मेशन का शानदार प्रदर्शन किया गया, जिसकी अगुवाई कर्नल विजय प्रताप ने की। टोही दल में 61 कैवलरी बैटल एरे वर्दी में शामिल हुई, जबकि हाई मोबिलिटी रिकोनिसेंस व्हीकल और भारत का पहला स्वदेशी बख्तरबंद लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल भी प्रदर्शित किया गया।

वीरता पुरस्कारों में विशेष सम्मान मिला। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया। शुभांशु अंतरिक्ष यात्री के रूप में भारत के पहले व्यक्ति बने, जिन्हें शांति काल का सर्वोच्च वीरता पुरस्कार मिला। परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (रिटायर्ड) और सूबेदार मेजर संजय कुमार सहित अन्य वीरों को भी सम्मानित किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रपति मुर्मू को 21 तोपों की सलामी दी गई। परेड की कमान लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार ने संभाली, जबकि मेजर जनरल नवराज ढिल्लों सेकंड-इन-कमांड थे।

यह गणतंत्र दिवस वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद पहला अवसर था, जिसमें भारत ने अपनी सैन्य क्षमता, स्वदेशी तकनीक और राष्ट्रीय गौरव को विश्व पटल पर प्रदर्शित किया। पूरे देश में उत्साह और देशभक्ति की लहर छाई रही।