10 दिनों में तीसरी बार बढ़ें पेट्रोल-डीजल के दाम, कांग्रेस ने मोदी सरकार को घेरा, कहा- जनता पर महंगाई का बोझ...
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर Indian National Congress ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री Narendra Modi की सरकार आम लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ा रही है, जबकि तेल कंपनियों के मुनाफे को प्राथमिकता दी जा रही है।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि पिछले नौ दिनों में पेट्रोल और डीजल के दाम करीब 5 रुपये तक बढ़ाए जा चुके हैं। पार्टी ने कहा कि शनिवार को फिर पेट्रोल 94 पैसे और डीजल 95 पैसे महंगा कर दिया गया।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार महंगाई से परेशान जनता को राहत देने के बजाय तेल कंपनियों के फायदे की चिंता कर रही है। पार्टी ने कहा कि दुनिया के कई देश अपने नागरिकों को राहत देने के लिए कदम उठा रहे हैं, जबकि भारत में लगातार ईंधन के दाम बढ़ाए जा रहे हैं।
10 दिनों में तीसरी बार बढ़े दाम
वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता के बीच पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बार है जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। Delhi में पेट्रोल की कीमत 87 पैसे बढ़कर 99.51 रुपये प्रति लीटर हो गई, जबकि डीजल 91 पैसे महंगा होकर 92.49 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया।
Kolkata में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई। यहां पेट्रोल 94 पैसे महंगा होकर 110.64 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95 पैसे बढ़कर 97.02 रुपये प्रति लीटर हो गया।
Mumbai में पेट्रोल 90 पैसे बढ़कर 108.49 रुपये प्रति लीटर और डीजल 94 पैसे महंगा होकर 95.02 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया।
वहीं Chennai में पेट्रोल 82 पैसे बढ़कर 105.31 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87 पैसे बढ़कर 96.98 रुपये प्रति लीटर हो गया।
पहले भी बढ़ चुके हैं दाम
इससे पहले मंगलवार को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया गया था। वहीं 15 मई को केंद्र सरकार ने पूरे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।
Jaipur में पिछली बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल 108.91 रुपये प्रति लीटर और डीजल 94.15 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया था।
पश्चिम एशिया संकट का असर
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा संकट के कारण वैश्विक तेल बाजार प्रभावित हुआ है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग में रुकावट की आशंका से कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ा है।
इसी वजह से दुनिया भर में ऊर्जा बचत और ईंधन के सीमित उपयोग की अपील भी की जा रही है।