ओलंपिक में पदक क्यों नहीं बढ़ रहे? PM Modi ने बताया जीत का मंत्र, कहा- हर खेल में भारत की भागीदारी जरूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेलो इंडिया संवाद में भारतीय खेलों की चुनौती पर बात की। उन्होंने कहा कि भारत ओलंपिक की आधी से ज्यादा स्पर्धाओं में हिस्सा नहीं लेता। पीएम मोदी ने पदक तालिका सुधारने के लिए खेलों में भागीदारी बढ़ाने, प्लेग्राउंड को बढ़ावा देने और शीतल देवी जैसे खिलाड़ियों से प्रेरणा लेने पर जोर दिया।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय खेलों की एक बड़ी चुनौती की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि भारत अभी ओलंपिक की आधी से ज्यादा प्रतियोगिताओं में भागीदारी ही नहीं करता। उन्होंने इसे भारतीय खेलों की “कड़वी सच्चाई” बताते हुए कहा कि ओलंपिक पदक तालिका में अपनी स्थिति सुधारने के लिए देश को ज्यादा से ज्यादा खेलों में अपनी भागीदारी बढ़ानी होगी।
प्रधानमंत्री बृहस्पतिवार को ‘खेलो इंडिया संवाद’ के तहत देशभर में खिलाड़ियों, छात्रों और स्वयंसेवकों समेत खेलों से जुड़े लोगों को वर्चुअल माध्यम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जिन खेलों को अतीत में नजरअंदाज किया गया, उनमें भारत की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। उनके मुताबिक खेलों के प्रति उनका दृष्टिकोण केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेलों को राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाना है।
सर्किंग और स्पोर्ट क्लाइंबिंग का दिया उदाहरण
पीएम मोदी ने सर्किंग और स्पोर्ट क्लाइंबिंग जैसे खेलों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन खेलों में अब तक किसी भारतीय ने ओलंपिक में हिस्सा नहीं लिया है। दोनों खेल लॉस एंजिलस ओलंपिक 2028 का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के पास विशाल तटीय क्षेत्र और बड़े पहाड़ी इलाके हैं, जहां इन खेलों के लिए स्वाभाविक संभावनाएं मौजूद हैं। वाटर स्पोर्ट्स से लेकर शीतकालीन खेलों तक देश के पास जरूरी आबादी, भूगोल और प्रतिभा मौजूद है। इसके बावजूद इन खेलों में भारत की वैश्विक मौजूदगी बेहद सीमित है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पदक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए देश के अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे खेलों के अवसर बढ़ाने होंगे और प्रतिभाओं को उनमें आगे आने का मौका देना होगा।
‘खेल हमें बेहतर प्रतिद्वंद्वी बनना भी सिखाता है’
पीएम मोदी ने कहा कि खेल केवल चैंपियन बनने की सीख नहीं देता, बल्कि बेहतर प्रतिद्वंद्वी बनना भी सिखाता है। खेल व्यक्ति को गिरने के बाद दोबारा उठने का जज्बा देता है।
उन्होंने कहा कि स्क्रीन और प्ले स्टेशन से ज्यादा जरूरी प्लेग्राउंड हैं। प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को लाल किले से खेलों को लेकर दिए गए अपने दृष्टिकोण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि खेलों की चर्चा केवल पदकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। यह विकसित भारत के निर्माण में देश की खेल शक्ति और युवा शक्ति को साथ जोड़ने का अभियान है।
शीतल देवी के संघर्ष का किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के लोड्धर गांव की पैरा तीरंदाज शीतल देवी के संघर्ष और उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शीतल के पदक जीतने पर जम्मू-कश्मीर के साथ पूरा देश गर्व से भर उठा।
पीएम मोदी ने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को बेहतर इंसान भी बनाता है। शीतल देवी की कहानी खेल से मिलने वाले इसी जज्बे और संघर्ष की मिसाल है। उन्होंने कहा कि खेल हमें उठना, गिरना और गिरकर फिर उठना सिखाता है।