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मिडिल ईस्ट तनाव पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, बोले- भारत को लंबे असर के लिए रहना होगा तैयार

 

नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखने लगा है। इस बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने सोमवार को संसद में कहा कि इस युद्ध के परिणाम दूरगामी होंगे और भारत को इसके प्रभाव के लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा।

लोकसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने और जहाजों पर हो रहे हमलों ने भारत के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह क्षेत्र भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

ऊर्जा सुरक्षा पर भारत की तैयारी

पीएम मोदी ने बताया कि बीते एक दशक में भारत ने संकट की स्थिति से निपटने के लिए अपने क्रूड ऑयल स्टोरेज को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है, जिसे बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा करने पर काम जारी है।

उन्होंने यह भी बताया कि पहले भारत 27 देशों से ऊर्जा आयात करता था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गई है, जिससे आपूर्ति में विविधता आई है।

सप्लाई और रिफाइनिंग क्षमता पर जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने घरेलू तैयारियों को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है। देश की रिफाइनिंग क्षमता में वृद्धि की गई है और तेल-गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कई देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है।

अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना

पीएम मोदी ने माना कि मौजूदा हालात ने भारत के सामने नई तरह की आर्थिक, सुरक्षा और मानवीय चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र से भारत के गहरे व्यापारिक संबंध हैं और यहीं से देश के तेल और गैस आयात का बड़ा हिस्सा गुजरता है।

गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, जहां से दुनिया की करीब 20% ऊर्जा सप्लाई होती है।