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ब्रातिस्लावा के राष्ट्रपति भवन में सजा बनारस, काशी पर आधारित प्रदर्शनी से मंत्रमुग्ध हुए PM मोदी
 

 

नई दिल्ली/ब्रातिस्लावा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया की अपनी दो दिवसीय ऐतिहासिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। वर्ष 1993 में स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला दौरा रहा। इस दौरान भारत और स्लोवाकिया के बीच आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, शिक्षा, रोजगार और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कई अहम समझौते हुए। दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को अब "व्यापक साझेदारी" (Comprehensive Partnership) का दर्जा देने पर सहमति जताई।

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी के साथ राजधानी ब्रातिस्लावा स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष कला प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी का मुख्य विषय भारत का प्राचीन सांस्कृतिक नगर वाराणसी था। प्रदर्शनी में उन स्लोवाकियाई कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं, जिन्होंने हाल ही में वाराणसी की यात्रा कर वहां की आध्यात्मिकता, संस्कृति, घाटों और ऐतिहासिक विरासत को अपने कैनवास पर उकेरा था।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अनुभव को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा करते हुए इसे "ब्रातिस्लावा में बनारस से जुड़ाव" बताया। उन्होंने लिखा कि कला और संस्कृति में लोगों को एक-दूसरे के करीब लाने की अद्भुत शक्ति होती है। प्रधानमंत्री ने प्रदर्शनी में शामिल सभी कलाकारों को बधाई देते हुए उनके प्रयासों की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वाराणसी पर केंद्रित यह प्रदर्शनी भारत और स्लोवाकिया के बीच बढ़ते सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक है। स्लोवाक कलाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से काशी की समृद्ध विरासत और सांस्कृतिक वैभव को यूरोप के लोगों तक पहुंचाने का कार्य किया है।

इस यात्रा का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्लोवाकिया के सर्वोच्च राजकीय सम्मान से सम्मानित किया गया। इसे दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों और आपसी विश्वास का प्रतीक माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल राजनीतिक और आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने भारत और स्लोवाकिया के बीच सांस्कृतिक एवं जन-जन के रिश्तों को भी नई मजबूती प्रदान की है।