महिला आरक्षण पर पीएम मोदी का बड़ा बयान, बोले- "यह सिर्फ कानून नहीं, देश की दिशा तय करने वाला निर्णय है"
New Delhi : संसद के विशेष तीन दिवसीय सत्र के पहले दिन गुरुवार को केंद्र सरकार ने लोकसभा में तीन संशोधन विधेयक पेश किए। इन विधेयकों के जरिए 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण बिल) को लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही परिसीमन से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने ये विधेयक सदन के पटल पर रखे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा को संबोधित किया और महिला सशक्तिकरण, लोकतांत्रिक भागीदारी और विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की प्रमुख बातें
- पीएम मोदी ने कहा कि यह संसद के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है और इससे निकला निर्णय देश की दिशा तय करेगा।
- 21वीं सदी का भारत नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर उसकी स्वीकार्यता बढ़ी है।
- देश की 50% आबादी को नीति-निर्धारण में भागीदारी देना समय की मांग है।
- महिला आरक्षण के विरोध पर कहा कि समय के साथ जनता ने ऐसे रुख को स्वीकार नहीं किया।
- पंचायत स्तर पर महिलाओं को आरक्षण देकर लोकतंत्र को मजबूत किया गया है।
- पिछले 25–30 वर्षों में महिलाएं जमीनी स्तर पर नेतृत्व में आगे आई हैं।
- महिलाएं अब सिर्फ कामकाज का हिस्सा नहीं, बल्कि निर्णय प्रक्रिया का भी हिस्सा बनना चाहती हैं।
- विपक्ष को संदेश देते हुए कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहिए।
- जो लोग इस फैसले का विरोध करेंगे, उन्हें भविष्य में राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
- सरकार को किसी तरह का क्रेडिट नहीं चाहिए और यह पूरी प्रक्रिया सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
राजनीतिक सरगर्मी तेज
संसद में पेश इन विधेयकों को लेकर सियासी माहौल गरम हो गया है। सरकार जहां इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसकी टाइमिंग और राजनीतिक नीयत पर सवाल उठा रहा है।