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PM Vishwakarma Yojana: 30 लाख कारीगरों का रजिस्ट्रेशन, 24.50 लाख को मिली स्किल ट्रेनिंग, 5,297 करोड़ का लोन

PM Vishwakarma Yojana के तहत 30 लाख लाभार्थियों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। करीब 24.50 लाख लोगों को बेसिक स्किल ट्रेनिंग, 18.15 लाख को आधुनिक टूलकिट और 6.18 लाख विश्वकर्माओं को 5 फीसदी ब्याज पर ₹1 लाख तक का लोन मिला है। पश्चिम बंगाल से भी 7 लाख से ज्यादा आवेदन आए हैं।
 

PM Vishwakarma Yojana: प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत देशभर में अब तक 30 लाख पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है। इनमें करीब 24.50 लाख लाभार्थियों को बेसिक स्किल ट्रेनिंग दी जा चुकी है। वहीं, 18.15 लाख आधुनिक टूलकिट भी लाभार्थियों तक पहुंचाई गई हैं। योजना के तहत 6.18 लाख विश्वकर्माओं को 5 फीसदी सालाना रियायती ब्याज दर पर 1 लाख रुपये तक का लोन मिला है, जिसकी कुल राशि ₹5,297 करोड़ है।

केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) मंत्री जीतन राम मांझी ने ये आंकड़े पीएम विश्वकर्मा योजना की तीसरी वर्षगांठ के मौके पर साझा किए। MSME मंत्रालय की ओर से यह कार्यक्रम कोलकाता के धनो धान्यो ऑडिटोरियम में आयोजित किया गया।

17 सितंबर 2023 को शुरू हुई थी योजना

पीएम विश्वकर्मा योजना की शुरुआत 17 सितंबर 2023 को की गई थी। इसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को एक ही योजना के तहत पहचान, कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट, रियायती ऋण और बाजार से जुड़ी सहायता उपलब्ध कराना है।

योजना के तहत 18 पारंपरिक ट्रेड से जुड़े कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता देने का प्रावधान है। सरकार के अनुसार, इसका मकसद पारंपरिक कौशल को मजबूत करने के साथ कारीगरों की आजीविका और उद्यमिता क्षमता को बढ़ाना है।

24.50 लाख लोगों को मिली बेसिक स्किल ट्रेनिंग

सरकार के अनुसार, योजना से जुड़े करीब 24.50 लाख लाभार्थियों को बेसिक स्किल ट्रेनिंग मिल चुकी है। इस प्रशिक्षण के जरिए कारीगरों को आधुनिक उपकरणों, बेहतर कार्य पद्धतियों, नए डिजाइन, डिजिटल लेनदेन, मार्केटिंग और उद्यमिता से जुड़ी जानकारी दी जाती है।

योजना के तहत बेसिक ट्रेनिंग आम तौर पर 5 से 7 दिनों की होती है, जबकि एडवांस ट्रेनिंग 15 दिन या उससे अधिक की हो सकती है। प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थियों को प्रतिदिन ₹500 का स्टाइपेंड भी दिया जाता है।

18.15 लाख आधुनिक टूलकिट बांटी गईं

कारीगरों को उनके काम के हिसाब से आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने पर भी योजना में जोर दिया गया है। MSME मंत्री के मुताबिक, इंडिया पोस्ट के जरिए 18.15 लाख आधुनिक टूलकिट लाभार्थियों तक पहुंचाई जा चुकी हैं।

टूलकिट सहायता का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को बेहतर उपकरण उपलब्ध कराकर उनके काम की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार करना है।

6.18 लाख विश्वकर्माओं को मिला ₹1 लाख तक का लोन

योजना के तहत कारीगरों को अपना काम शुरू करने या मौजूदा कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए रियायती दर पर क्रेडिट सहायता भी दी जा रही है।

अब तक 6.18 लाख लाभार्थियों को ₹1 लाख तक का लोन 5 फीसदी सालाना की रियायती ब्याज दर पर दिया गया है। इन ऋणों के तहत कुल ₹5,297 करोड़ की राशि वितरित की गई है।

सरकार की योजना में आगे दूसरे चरण में ₹2 लाख तक की अतिरिक्त क्रेडिट सहायता का भी प्रावधान है। दूसरे चरण का लाभ निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले लाभार्थियों को मिलता है।

पश्चिम बंगाल से मिले 7 लाख से ज्यादा आवेदन

पीएम विश्वकर्मा योजना के क्रियान्वयन में पश्चिम बंगाल हाल ही में शामिल हुआ है। राज्य में अब तक इस योजना के तहत 7 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।

कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार विश्वकर्माओं को योजना का लाभ दिलाने के लिए जरूरी सहायता उपलब्ध कराने और इसके क्रियान्वयन में तेजी लाने की दिशा में काम करेगी। पश्चिम बंगाल को मई 2026 में योजना के क्रियान्वयन में शामिल किया गया था।

महिलाओं की उद्यमिता पर भी जोर

MSME राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लाभार्थियों को योजना के तहत उपलब्ध अवसरों और सहायता का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने खास तौर पर महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की आर्थिक और उद्यमी क्षमता को मजबूत करना मजबूत परिवारों और समुदायों के साथ एक समृद्ध विकसित भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

कोलकाता में हुआ तीसरी वर्षगांठ का कार्यक्रम

MSME मंत्रालय ने पीएम विश्वकर्मा योजना की तीसरी वर्षगांठ के मौके पर कोलकाता में कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें पारंपरिक कला और शिल्प को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के कारीगरों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और आईडी कार्ड, टूलकिट तथा ₹1 लाख के लोन से जुड़े चेक भी वितरित किए गए।

सरकार के अनुसार, पीएम विश्वकर्मा योजना का फोकस पारंपरिक कारीगरों को केवल वित्तीय सहायता देने तक सीमित नहीं है। इसके तहत उन्हें कौशल, आधुनिक उपकरण, क्रेडिट, डिजिटल लेनदेन और बाजार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, ताकि पारंपरिक व्यवसायों को औपचारिक MSME इकोसिस्टम से भी जोड़ा जा सके।