राफेल मरीन ने INS विक्रांत पर उतरने का परीक्षण किया, भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को मिलेगी नई मजबूती
New Delhi : भारतीय नौसेना के स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर राफेल मरीन लड़ाकू विमान की पहली लैंडिंग सफल होने की खबर सामने आई है। प्राप्त विवरण के अनुसार, 29 अक्टूबर को राफेल मरीन ने विमानवाहक पोत के सीमित आकार वाले फ्लाइट डेक पर पहली ही कोशिश में सफलतापूर्वक उतरने का परीक्षण पूरा किया।
इस घटनाक्रम को भारतीय नौसेना की विमानवाहक पोत आधारित लड़ाकू क्षमता के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। हालांकि, इस विशेष परीक्षण की आधिकारिक पुष्टि और वीडियो की प्रामाणिकता का स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है।
पहली ही कोशिश में सफल लैंडिंग का दावा
रिपोर्ट के मुताबिक, राफेल मरीन लड़ाकू विमान ने 29 अक्टूबर को आईएनएस विक्रांत के फ्लाइट डेक पर उतरने का परीक्षण किया। दावा है कि विमान ने पहली ही कोशिश में सुरक्षित लैंडिंग की।
विमानवाहक पोत पर लड़ाकू विमान की लैंडिंग जमीन पर बने सामान्य हवाई अड्डे से काफी अलग होती है। समुद्र में लगातार गतिशील रहने वाले पोत के छोटे फ्लाइट डेक पर उतरने के लिए पायलट को अत्यंत सटीक नियंत्रण बनाए रखना पड़ता है।
विमानवाहक पोत पर लैंडिंग क्यों होती है चुनौतीपूर्ण?
आईएनएस विक्रांत जैसे विमानवाहक पोत समुद्र में तैरते हवाई अड्डे की तरह काम करते हैं। हालांकि, इनका फ्लाइट डेक सामान्य हवाई पट्टी की तुलना में काफी छोटा होता है।
ऐसे में लड़ाकू विमानों को विशेष तकनीक और उपकरणों की सहायता से सुरक्षित उतारा जाता है। विमान की गति, पोत की स्थिति, समुद्री हवा और लैंडिंग के समय नियंत्रण जैसे कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राफेल मरीन को विशेष रूप से विमानवाहक पोत से संचालन के लिए विकसित किया गया है।
भारतीय नौसेना के लिए क्यों महत्वपूर्ण है राफेल मरीन?
राफेल मरीन फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन द्वारा विकसित राफेल लड़ाकू विमान का नौसैनिक संस्करण है। इसे समुद्री अभियानों और विमानवाहक पोत से उड़ान भरने तथा उतरने के लिए तैयार किया गया है।
भारत ने अप्रैल 2025 में भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमानों की खरीद का समझौता किया था। इन विमानों को नौसेना की भविष्य की विमानवाहक पोत आधारित लड़ाकू क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
A Rafale Marine aircraft successfully landed onboard #IndianNavy's indigenous Aircraft Carrier #INSVikrant on its maiden attempt on 29 Oct 26. The ongoing trials mark the first steps towards operationalisation of the aircraft in the #IndianNavy. https://t.co/gIZ0h3nl80
— SpokespersonNavy (@indiannavy) October 30, 2026
INS विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत
आईएनएस विक्रांत भारत में निर्मित पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत है। इसे सितंबर 2022 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
विमानवाहक पोत समुद्र में लंबी दूरी तक हवाई अभियानों को संचालित करने की क्षमता प्रदान करते हैं। आईएनएस विक्रांत पर नए लड़ाकू विमानों के संचालन की तैयारी भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने की व्यापक योजना का हिस्सा है।
आगे के परीक्षण होंगे महत्वपूर्ण
किसी लड़ाकू विमान की एक सफल लैंडिंग से उसकी पूर्ण परिचालन तैयारी प्रमाणित नहीं होती। इसके लिए उड़ान, लैंडिंग, टेकऑफ, सुरक्षा प्रक्रियाओं और विभिन्न समुद्री परिस्थितियों में संचालन से संबंधित व्यापक परीक्षण आवश्यक होते हैं। इसलिए राफेल मरीन और आईएनएस विक्रांत की परिचालन अनुकूलता से जुड़े आगे के परीक्षण भी महत्वपूर्ण होंगे।