राहुल गांधी ने एलन मस्क का दिया साथ तो BJP ने क्यों घेरा? Starlink विवाद में अंबानी-अडानी का क्या है मामला?
नई दिल्ली। भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink को मंजूरी मिलने में हो रही देरी अब राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के मस्क के समर्थन में किए गए सोशल मीडिया पोस्ट के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं। BJP का आरोप है कि कांग्रेस पहले Starlink को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा और कारोबारी हितों पर सवाल उठाती थी, लेकिन अब सरकार से कंपनी को मंजूरी देने में देरी का हिसाब मांग रही है।
विवाद तब शुरू हुआ, जब SpaceX के प्रमुख एलन मस्क ने भारत में Starlink की व्यावसायिक शुरुआत में हो रही देरी पर सवाल उठाते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी का नाम लिया। इसके बाद राहुल गांधी ने तंज कसते हुए लिखा, “Welcome to India, Elon. Wait till you discover the other guy.” उनके इस बयान को गौतम अडानी की ओर इशारे के तौर पर देखा गया। मस्क ने राहुल के पोस्ट पर जवाब देते हुए कहा, “Thank you, Rahul. This is indeed troubling.”
एलन मस्क ने मुकेश अंबानी पर क्यों उठाए सवाल?
एलन मस्क की कंपनी Starlink भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना चाहती है, लेकिन व्यावसायिक संचालन के लिए जरूरी सुरक्षा मंजूरी और अन्य नियामकीय औपचारिकताएं अभी पूरी नहीं हुई हैं।
मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूह भारत में Starlink की एंट्री रोकने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी सवाल किया कि 165 से अधिक देशों में लाइसेंस प्राप्त होने के बावजूद भारत में कंपनी को मंजूरी मिलने में देरी क्यों हो रही है।
मस्क ने सीधे मुकेश अंबानी का नाम लेते हुए पूछा कि क्या वही भारत के असली बॉस हैं। हालांकि, सरकार ने उनके आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि देश में सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए नियामकीय प्रक्रिया निष्पक्ष है और किसी एक कंपनी को निशाना नहीं बनाया जा रहा है।
राहुल गांधी ने क्या कहा और BJP ने क्यों घेरा?
राहुल गांधी ने मस्क की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि भारत में उनका स्वागत है और उन्हें दूसरे कारोबारी का पता चलने तक इंतजार करना चाहिए। राहुल की इस टिप्पणी को अडानी समूह पर उनके पुराने राजनीतिक हमलों से जोड़कर देखा गया।
इसके बाद BJP नेताओं ने कांग्रेस पर दोहरे रुख का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जब Starlink को भारत में प्रवेश देने की चर्चा थी, तब कांग्रेस ने विदेशी कारोबारी को फायदा पहुंचाने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाए थे। अब जब कंपनी को मंजूरी मिलने में देरी हो रही है, तो राहुल गांधी उसी कंपनी के पक्ष में बोलते दिखाई दे रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी पहले एक व्यक्ति को लाइसेंस देने पर आपत्ति जता रही थी और अब उसी व्यक्ति को लाइसेंस नहीं मिलने पर सवाल उठा रही है।
BJP नेताओं ने इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस की कथित दोहरी नीति बताया है। हालांकि, यह राजनीतिक आरोप है और कांग्रेस ने इसे अलग नजरिए से पेश किया है।
कांग्रेस ने राहुल गांधी के बयान का क्या बचाव किया?
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने राहुल गांधी की टिप्पणी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि राहुल का बयान एलन मस्क या सरकार की नीति का समर्थन नहीं था, बल्कि भारत में कारोबार और सरकारी नीतियों पर प्रभाव रखने वाले बड़े उद्योगपतियों को लेकर एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी थी।
कार्ति चिदंबरम के मुताबिक, राहुल गांधी का इशारा इस बात की ओर था कि भारत में बाजार पर कुछ बड़े कारोबारी समूहों का प्रभाव है। कांग्रेस लंबे समय से केंद्र सरकार पर कुछ उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाती रही है।
यही वजह है कि Starlink विवाद केवल एक विदेशी कंपनी को मंजूरी मिलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए सरकार और बड़े कारोबारी समूहों के संबंधों को लेकर चल रही राजनीतिक बहस भी फिर सामने आ गई है।
Starlink को मंजूरी क्यों नहीं मिली? सरकार ने क्या कहा?
सरकार के मुताबिक, भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए कंपनियों को लाइसेंस के साथ-साथ जरूरी सुरक्षा जांच और स्पेक्ट्रम संबंधी मंजूरियां भी लेनी होती हैं। दूरसंचार मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि प्रक्रिया किसी एक कंपनी के लिए अलग नहीं है।
भारत में इस क्षेत्र में तीन प्रमुख कंपनियां नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया में हैं:
Starlink: एलन मस्क की SpaceX की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा।
Jio Satellite Communications: रिलायंस समूह की सैटेलाइट संचार कंपनी।
Eutelsat OneWeb: भारती समूह समर्थित सैटेलाइट संचार सेवा।
सरकार ने कहा है कि तीनों कंपनियों की सुरक्षा संबंधी जांच चल रही है और वे नियामकीय प्रक्रिया के लगभग समान चरण में हैं। इसका मतलब है कि Starlink को व्यावसायिक सेवा शुरू करने की अनुमति मिलने में देरी को केवल अंबानी या किसी दूसरे कारोबारी के प्रभाव से जोड़ना सरकार के आधिकारिक रुख से मेल नहीं खाता।
राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा भी विवाद के केंद्र में
Starlink विवाद में राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सैटेलाइट इंटरनेट नेटवर्क देश के दूरदराज के इलाकों में कनेक्टिविटी देने के साथ-साथ संवेदनशील क्षेत्रों में भी इस्तेमाल हो सकता है।
भारत में सुरक्षा एजेंसियां और नियामक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सेवा से जुड़ी तकनीकी व्यवस्था, नेटवर्क संचालन और डेटा सुरक्षा निर्धारित शर्तों के अनुरूप हों। रिपोर्ट के मुताबिक, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में Starlink डिवाइस बरामद होने और मणिपुर में उग्रवादियों के पास ऐसे उपकरण मिलने की घटनाओं का भी सुरक्षा संबंधी चर्चा में उल्लेख हुआ है। मस्क ने हालांकि कहा है कि भारत में Starlink की सेवाएं सक्रिय नहीं की गई हैं।
BJP का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर कांग्रेस का मौजूदा रुख उसके पुराने बयानों से अलग दिखाई देता है। दूसरी ओर, कांग्रेस इस विवाद को बड़े उद्योगपतियों के प्रभाव और सरकार की कारोबारी नीतियों से जोड़ रही है।
Starlink विवाद का राजनीतिक असर क्या होगा?
राहुल गांधी के लिए यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब कांग्रेस मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सरकार पर हमलावर है। India Today की रिपोर्ट के विश्लेषण के मुताबिक, Starlink पर राहुल की टिप्पणी से BJP को कांग्रेस के पुराने बयानों को उठाकर जवाबी हमला करने का अवसर मिला है।
हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस विवाद से किसी पार्टी को निश्चित राजनीतिक फायदा या नुकसान होगा। फिलहाल बहस तीन प्रमुख सवालों के इर्द-गिर्द घूम रही है—Starlink को मंजूरी मिलने में देरी क्यों हो रही है, क्या सुरक्षा जांच सभी कंपनियों के लिए समान है और बड़े कारोबारी समूहों के प्रभाव को लेकर कांग्रेस तथा BJP के आरोपों में कितना दम है।
जब तक सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम संबंधी औपचारिकताएं पूरी नहीं होतीं, Starlink भारत में अपनी व्यावसायिक सेवा शुरू नहीं कर सकती। इस बीच, मस्क, राहुल गांधी और BJP के बीच बयानबाजी ने तकनीकी और नियामकीय मुद्दे को एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल दिया है।