UPI के नए चार्ज पर राहुल गांधी का हमला, बोले- मोदी जी, UPI टैक्स वापस लीजिए
नई दिल्ली: डिजिटल पेमेंट के नए नियमों को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट UPI लेन-देन पर प्रस्तावित 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को 'UPI टैक्स' बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि इस फैसले का बोझ अंततः आम जनता की जेब पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार भले ही ग्राहकों से सीधे कोई शुल्क नहीं लेने की बात कर रही हो, लेकिन दुकानदार इस लागत को कीमतों में जोड़कर ग्राहकों से वसूल सकते हैं।
राहुल गांधी का सरकार पर निशाना
राहुल गांधी ने अपने वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि UPI पर शुल्क लगाने से हर भारतीय पर बोझ पड़ेगा। उन्होंने अमेरिका को लेकर भी सरकार पर आरोप लगाए और प्रधानमंत्री से 'अमेरिका के सामने लेटना बंद करने' और UPI शुल्क वापस लेने की अपील की।
वीडियो में राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर राजनीतिक टिप्पणी भी की।
'दुकानदार कीमतें बढ़ाकर जनता से वसूलेंगे पैसा'
इससे पहले राहुल गांधी ने एक X पोस्ट में दावा किया था कि ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट UPI लेन-देन पर MDR लगाने का रास्ता खोला गया है। उन्होंने कहा कि ऐसे लेन-देन की संख्या भले ही करीब 5 फीसदी हो, लेकिन UPI के कुल ट्रांजैक्शन मूल्य में इनकी हिस्सेदारी लगभग 65 फीसदी है।
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि यदि ग्राहकों से सीधे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो दुकानदारों पर लगने वाली फीस की भरपाई कैसे होगी। उनके मुताबिक, इसका असर वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के जरिए ग्राहकों पर पड़ सकता है।
उन्होंने केंद्र सरकार पर अमेरिकी भुगतान कंपनियों के दबाव में आकर भारत की जीरो-MDR नीति में बदलाव का रास्ता खोलने का आरोप भी लगाया। हालांकि, ये आरोप राहुल गांधी के राजनीतिक दावे हैं।
क्या है नया UPI फ्रेमवर्क?
दरअसल, सरकार की ओर से UPI पेमेंट को लेकर एक नया फ्रेमवर्क जारी किए जाने की बात सामने आई है। इसके तहत ₹2,000 से अधिक के कुछ मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 फीसदी MDR लगाने का प्रावधान बताया गया है।
सरकार का कहना है कि इसका असर आम ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा और उनसे कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जाएगा। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस जारी है और इसके संभावित प्रभावों पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।