आतंकवाद पर राजनाथ सिंह का बड़ा बयान, बोले- आतंक के खिलाफ कार्रवाई में सीमा नहीं बनेगी बाधा, सेना को दी खुली छूट
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। 24 सितंबर को नई दिल्ली में एक रक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवादी ढांचे को खत्म करने के रास्ते में कोई सीमा भारत के लिए बाधा नहीं बनेगी। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादियों और उन्हें समर्थन देने वालों के बीच कोई अंतर नहीं किया जाएगा।
राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति स्पष्ट कर दी है। उनके मुताबिक, भारत का रुख अब केवल आतंकवाद को रोकने या सीमित करने तक नहीं है, बल्कि इसके लिए जवाबी कार्रवाई की नीति पर जोर दिया जा रहा है।
‘जिस भाषा में समझता है, उसी में मिलेगा जवाब’
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत के पास अपनी बात रखने की ताकत भी है और जरूरत पड़ने पर ताकत के जरिए जवाब देने की क्षमता भी। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कार्रवाई की पूरी स्वतंत्रता दी गई है।
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत शांति में विश्वास रखने वाला देश है, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बदलते खतरों से निपटने के लिए व्यापक दृष्टिकोण जरूरी है।
ऑपरेशन सिंदूर का दिया उदाहरण
रक्षा मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की बदली नीति के उदाहरण के तौर पर ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने इस अभियान के जरिए आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख को दुनिया के सामने स्पष्ट किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर पाकिस्तान की जमीन से भारत के खिलाफ कोई आतंकी हमला होता है, तो उसे भारत के खिलाफ ‘युद्ध की कार्रवाई’ माना जाएगा और उसके अनुरूप जवाब दिया जाएगा। यह रक्षा मंत्री द्वारा 24 सितंबर को दिए गए संबोधन में कही गई बात है।
राजनाथ सिंह ने साथ ही कहा कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मजबूत अर्थव्यवस्था और सक्षम सैन्य शक्ति को महत्वपूर्ण बताया।