राम मंदिर चढ़ावा विवाद: टिन्नू यादव बोले- मेरा कोई लेना-देना नहीं, संपत्ति के आरोप भी बेबुनियाद
अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच चर्चा में आए टिन्नू यादव ने खुद पर लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि उनका मंदिर के चढ़ावे या उससे जुड़े किसी भी आर्थिक मामले से कोई संबंध नहीं है।
टिन्नू यादव ने स्पष्ट किया कि जिस मकान और संपत्ति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह उन्होंने वर्ष 2008 में खरीदी थी और उसका निर्माण वर्ष 2015-16 में कराया गया था। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के बाद संपत्ति बनाने के आरोप पूरी तरह गलत हैं।
उन्होंने कहा, "चढ़ावे से मेरा कोई वास्ता नहीं है। मेरा इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है। मैं केवल परिसर में साफ-सफाई, बिजली, पानी और अन्य व्यवस्थाओं की देखरेख करता हूं।"
चंपत राय और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ाव बताया
टिन्नू यादव ने अपने संगठनात्मक सफर का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने वर्ष 1988 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का ओटीसी प्रशिक्षण प्राप्त किया था। इसके बाद वर्ष 1993 से वह राम जन्मभूमि आंदोलन और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े रहे।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक संगठन में कार्य करने के दौरान उनका संपर्क श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से हुआ। टिन्नू के अनुसार, "मैं संगठन में ड्राइवर के रूप में काम करता था। राम मंदिर पर फैसला आने के बाद मुझे जन्मभूमि परिसर में जिम्मेदारी दी गई।"
एलएंडटी को मकान किराए पर देने का दावा
टिन्नू यादव ने बताया कि राम मंदिर निर्माण कार्य शुरू होने के बाद जब निर्माण कंपनी एलएंडटी अयोध्या पहुंची, तब उन्होंने अपना मकान कंपनी को किराए पर दिया था। गौरतलब है कि राम मंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एलएंडटी की सेवाएं ली थीं।
एसआईटी कर रही जांच
उधर, राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) अयोध्या में विभिन्न लोगों से पूछताछ कर रहा है। राज्य सरकार के निर्देश पर गठित यह टीम 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। जांच रिपोर्ट के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल टिन्नू यादव ने सभी आरोपों से खुद को अलग बताते हुए कहा है कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और उनकी संपत्तियों का मंदिर के चढ़ावे से कोई संबंध नहीं है।