{"vars":{"id": "130921:5012"}}

RBI डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता का बड़ा बयान: मुद्रास्फीति अनुमानों में कोई पूर्वाग्रह नहीं, यह वैश्विक समस्या है

Mumbai : RBI की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि मुद्रास्फीति अनुमानों में किसी तरह का संस्थागत पूर्वाग्रह नहीं है। अनुमान में त्रुटियां वैश्विक स्तर पर सामान्य हैं। आरबीआई कई मॉडल और डेटा का उपयोग कर पूर्वानुमान तैयार करता है। उन्होंने बताया कि भुगतान संतुलन के आंकड़े मासिक जारी करने पर भी विचार चल रहा है।
 

Mumbai : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने बुधवार को स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक के मुद्रास्फीति अनुमानों में “व्यवस्था के स्तर पर पूर्वाग्रह” जैसी कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि हर अनुमान में त्रुटियों का जोखिम रहता है और यह केवल भारत का मामला नहीं बल्कि वैश्विक घटना है।

मुद्रास्फीति अनुमान और मॉडलिंग

डिप्टी गवर्नर ने बताया कि आरबीआई अपने मुद्रास्फीति अनुमानों तक पहुँचने के लिए विभिन्न मॉडल, ऐतिहासिक डेटा, सर्वेक्षण और विशेषज्ञ चर्चाओं का उपयोग करता है। उन्होंने कहा कि अनुमानों का गलत होना सामान्य है और कोई भी संस्था हर बार सही पूर्वानुमान नहीं दे सकती।

पूनम गुप्ता ने यह भी कहा कि आरबीआई भुगतान संतुलन के आंकड़े मासिक आधार पर जारी करने पर विचार कर रहा है, जो वर्तमान में तिमाही आधार पर आते हैं। उन्होंने यह कदम वैश्विक व्यापार नीतियों में व्यापक बदलाव और देश की बाह्य स्थिति की बेहतर समझ के लिए महत्वपूर्ण बताया।

मीडिया में आलोचना पर प्रतिक्रिया

मुद्रास्फीति अनुमानों को लेकर मीडिया में उठ रही आलोचनाओं पर उन्होंने कहा कि यह ‘मजेदार’ होता है, लेकिन आरबीआई इन आलोचनाओं को गंभीरता से लेता है। उन्होंने बताया कि अनुमानों के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया जाता है जिसमें मॉडलिंग, ऐतिहासिक डेटा, सर्वेक्षण और संबंधित पक्षों से परामर्श शामिल है।

डिप्टी गवर्नर ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित मुद्रास्फीति में आने वाले संशोधन भारतीय रिजर्व बैंक के लिए मददगार साबित होंगे और इससे नीति निर्धारण में और सुधार संभव होगा।

पूनम गुप्ता के इस बयान से स्पष्ट हुआ कि आरबीआई मौद्रिक नीति निर्धारण में पारदर्शिता और विशेषज्ञता बनाए रखने की दिशा में सतत प्रयासरत है।