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RBI ने बढ़ाया Repo Rate, अब बढ़ेगी Loan EMI! होम, कार और पर्सनल लोन वालों पर क्या होगा असर

RBI ने रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया है। इसके बाद होम, कार और पर्सनल लोन की EMI बढ़ने या लोन का टेन्योर लंबा होने की संभावना है। जानिए फ्लोटिंग रेट लोन ग्राहकों पर क्या असर होगा और बढ़ा हुआ टेन्योर कम करने के लिए क्या करें।
 

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट बढ़ाया है। RBI के इस फैसले का असर बैंक से लोन लेने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है। खासकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन और अन्य खुदरा कर्ज की ब्याज दरों में बढ़ोतरी होने पर EMI या लोन की अवधि बढ़ सकती है।

EMI बढ़ेगी या लोन का टेन्योर?

रेपो रेट बढ़ने के बाद बैंक अपने लोन की ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं। इसका सबसे सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ता है, जिनका लोन फ्लोटिंग ब्याज दर से जुड़ा है। ऐसे मामलों में बैंक के पास EMI बढ़ाने, लोन की अवधि बढ़ाने या दोनों में बदलाव करने का विकल्प हो सकता है।

RBI के नियमों के मुताबिक, ब्याज दर में रीसेट के समय ग्राहकों को EMI बढ़ाने या EMI को समान रखते हुए लोन का टेन्योर बढ़ाने का विकल्प दिया जाना चाहिए। कुछ मामलों में ग्राहक फ्लोटिंग से फिक्स्ड रेट पर जाने या लोन का आंशिक अथवा पूरा प्रीपेमेंट करने का विकल्प भी चुन सकते हैं।

इसका मतलब यह है कि अगर बैंक EMI को तत्काल नहीं बढ़ाता और टेन्योर बढ़ा देता है, तो ग्राहक को ज्यादा समय तक किस्त चुकानी पड़ सकती है। लंबी अवधि का मतलब कुल ब्याज भुगतान भी बढ़ सकता है।

अगर बैंक ने लोन का टेन्योर बढ़ा दिया तो क्या करें?

अगर रेपो रेट बढ़ने के बाद आपके लोन की अवधि बढ़ जाती है, तो सबसे पहले बैंक से नया Amortization Schedule और अपडेटेड लोन स्टेटमेंट मांगें। इसमें नई ब्याज दर, EMI और बकाया लोन अवधि की जानकारी देखें।

इसके बाद बैंक से पूछें कि क्या EMI बढ़ाकर लोन की अवधि को पहले वाली स्थिति के करीब रखा जा सकता है। अगर आपकी मासिक आय इसकी अनुमति देती है तो यह विकल्प लंबे समय में ब्याज का बोझ कम कर सकता है।

RBI के नियमों के तहत पात्र फ्लोटिंग रेट लोन में ग्राहक को पार्ट-पेमेंट या प्रीपेमेंट का विकल्प भी मिल सकता है। RBI ने व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के फ्लोटिंग रेट टर्म लोन पर प्रीपेमेंट/फोरक्लोजर चार्ज लगाने पर रोक के नियम जारी किए हैं। हालांकि, किसी भी भुगतान से पहले अपने लोन एग्रीमेंट और बैंक की लागू शर्तों की जांच करना जरूरी है।

कौन से लोन पर जल्दी दिखेगा असर?

रेपो रेट से सीधे जुड़े External Benchmark Linked Rate (EBLR) वाले लोन पर ब्याज दर में बदलाव अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई दे सकता है। RBI के नियमों के अनुसार बैंकों के EBLR से जुड़े फ्लोटिंग रेट रिटेल और MSME लोन में ब्याज दर का रीसेट कम से कम तीन महीने में एक बार होना चाहिए।

वहीं, MCLR से जुड़े लोन में बदलाव का असर संबंधित बैंक की फंडिंग लागत और लोन की तय रीसेट अवधि पर निर्भर करता है। इसलिए हर ग्राहक की EMI या ब्याज दर में बदलाव एक ही समय पर होना जरूरी नहीं है।

नए लोन लेने वालों पर भी पड़ेगा असर

रेपो रेट बढ़ने के बाद नए होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों पर भी दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, किसी ग्राहक को मिलने वाली वास्तविक ब्याज दर बैंक की पॉलिसी, क्रेडिट प्रोफाइल, लोन की अवधि और अन्य शर्तों पर निर्भर करेगी।

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक State Bank of India की वेबसाइट पर होम लोन की शुरुआती ब्याज दर फिलहाल 7.25 प्रतिशत सालाना से दिखाई गई है, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी है। वास्तविक दर ग्राहक की पात्रता और लागू शर्तों के आधार पर अलग हो सकती है।

आगे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कितनी?

रेपो रेट बढ़ाने के साथ RBI ने अपनी मौद्रिक नीति का रुख 'calibrated tightening' कर दिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी संकेत दिया है कि निकट अवधि में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं है। ऐसे में आने वाले समय में लोन लेने वाले ग्राहकों को ब्याज दरों पर नजर रखनी होगी।

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1 प्रतिशत किया है, जबकि महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया गया है। ऐसे में केंद्रीय बैंक के फैसले का फोकस आर्थिक वृद्धि के साथ महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने पर भी है।

लोन ग्राहकों के लिए क्या है बेहतर रास्ता?

अगर आपका फ्लोटिंग रेट लोन चल रहा है और बैंक टेन्योर बढ़ाता है, तो सिर्फ EMI देखकर फैसला न लें। नई ब्याज दर, बाकी मूलधन, बची हुई अवधि और कुल ब्याज भुगतान को एक साथ देखें। संभव हो तो EMI में सीमित बढ़ोतरी या पार्ट-पेमेंट के जरिए टेन्योर कम करना लंबे समय में ब्याज का बोझ घटा सकता है।