लाल किला ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा: उमर उन नबी ने खुद कार में बैठकर किया था IED एक्टिव, NIA ने बताई पूरी साजिश
Red Fort Blast Update: दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर 2025 को हुआ धमाका आत्मघाती हमला था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से दाखिल चार्जशीट के मुताबिक, आरोपी उमर उन नबी धमाके के वक्त अपनी i20 कार के अंदर मौजूद था और उसी ने कार में लगे इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) को कमांड मैकेनिज्म के जरिए एक्टिव किया था। धमाके में 15 लोगों की मौत हुई थी।
NIA की करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट में इस हमले को अचानक की गई कार्रवाई नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रही साजिश का नतीजा बताया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, उमर उन नबी ने 2022 की शुरुआत से ही कथित तौर पर निष्क्रिय पड़े अंसार गजवत-उल-हिंद (AGuH) मॉड्यूल को दोबारा सक्रिय करने और ऐसे लोगों का नेटवर्क तैयार करने पर काम शुरू कर दिया था, जिन्हें आतंकी गतिविधियों के लिए तैयार किया जा सके।
लाल किले को ही क्यों बनाया गया निशाना?
चार्जशीट में NIA ने दावा किया है कि लाल किले को महज एक आम जगह के तौर पर नहीं चुना गया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, इसे भारतीय राज्य के प्रतीक के तौर पर देखा गया और इसी वजह से इसे निशाना बनाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि कथित साजिश से जुड़े लोगों ने दिसंबर 2023 से लाल किले की रेकी शुरू कर दी थी। उमर उन नबी और उसके साथियों ने कथित तौर पर कई बार इलाके का दौरा किया था।
धमाके की तारीख पहले से तय नहीं थी?
NIA की चार्जशीट में एक अहम बात यह भी सामने आई है कि हमले की तारीख कथित तौर पर पहले से तय नहीं थी। एजेंसी के अनुसार, श्रीनगर में कई गिरफ्तारियों के बाद उमर उन नबी को लगा कि जांच एजेंसियां कथित साजिश के करीब पहुंच रही हैं। इसके बाद उसने जल्दबाजी में हमले को अंजाम देने का फैसला किया।
i20 कार को बनाया गया था विस्फोटक वाहन
जांच एजेंसी के मुताबिक, धमाके में इस्तेमाल की गई कार को Vehicle-Borne Improvised Explosive Device (VBIED) में तब्दील किया गया था। जांच के दौरान कुछ ऐसे रसायन और लैब उपकरण भी बरामद होने का दावा किया गया, जो विस्फोटक तैयार करने और उन्हें रखने की कथित तैयारी की ओर इशारा करते हैं।
फॉरेंसिक जांच में घटनास्थल से मिले पदार्थों में TATP और अमोनियम नाइट्रेट के निशान मिले। NIA के मुताबिक, विस्फोटक उपकरण को कार के अंदर से ही कमांड मैकेनिज्म के जरिए सक्रिय किया गया था।
DNA जांच से हुई उमर की मौजूदगी की पुष्टि
चार्जशीट में NIA ने कहा है कि घटनास्थल से मिले जैविक नमूनों की DNA जांच से यह पुष्टि हुई कि उमर उन नबी धमाके के समय कार के अंदर मौजूद था। उमर पेशे से डॉक्टर था और फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर काम कर चुका था।
AGuH मॉड्यूल को दोबारा सक्रिय करने का आरोप
NIA ने उमर उन नबी को कथित तौर पर पुनर्जीवित किए गए AGuH मॉड्यूल का ‘ऑपरेशनल इन-चार्ज’ बताया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि उसने नए लोगों को कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रभावित करने, गुप्त बैठकें आयोजित करने, कथित आतंकी प्रशिक्षण की व्यवस्था करने, फंड जुटाने, अवैध हथियारों की खरीद और ठिकानों की व्यवस्था में भूमिका निभाई।
चार्जशीट के मुताबिक, कथित मॉड्यूल के सदस्य जम्मू-कश्मीर और दिल्ली-NCR में गुप्त बैठकें करते थे और एक-दूसरे से संपर्क के लिए Signal जैसे एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते थे।
‘Lone Mujahid Pocket Book’ का भी जिक्र
जांच के दौरान मिले कथित वैचारिक और ऑपरेशनल साहित्य का भी चार्जशीट में उल्लेख किया गया है। इनमें ‘Lone Mujahid Pocket Book/How to Become an Assassin’ नाम का दस्तावेज शामिल है, जिसे NIA ने अल-कायदा इन द अरबियन पेनिनसुला (AQAP) से जुड़ा बताया है।
एजेंसी के अनुसार, इस सामग्री में विस्फोटक, हथियार, गुप्त गतिविधियों और IED से जुड़ी जानकारी के साथ-साथ हिंसक और आत्मघाती हमलों को बढ़ावा देने वाली सामग्री थी।
जांच एजेंसी ने कुछ अन्य दस्तावेजों का भी उल्लेख किया है, जिनमें Definition of Jihad, The Requirements of Jihad, The 21 Aims and Objectives of Jihad, 39 Ways to Serve and Participate in Jihad और 44 Ways to Support Jihad शामिल हैं। NIA का आरोप है कि इस सामग्री का इस्तेमाल हिंसक चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने और लोगों को कथित आतंकी गतिविधियों के लिए प्रभावित करने में किया गया।
करीब दो साल चली कथित साजिश
NIA की चार्जशीट के मुताबिक, लाल किला ब्लास्ट किसी एक दिन की योजना का परिणाम नहीं था। जांच एजेंसी ने इसे करीब दो साल तक चली कथित साजिश से जोड़ा है। इस दौरान आतंकी मॉड्यूल को फिर से खड़ा करने, लोगों को जोड़ने, बैठकों, रेकी, संसाधन जुटाने और हमले की तैयारी जैसे कई चरणों की जांच की गई।
उमर उन नबी की धमाके में मौत हो गई थी। इसलिए उसके खिलाफ आगे की आपराधिक कार्यवाही उसके निधन के कारण समाप्त मानी जाती है, लेकिन चार्जशीट में जांच एजेंसी ने कथित साजिश और उसमें उसकी भूमिका का विस्तृत ब्यौरा दिया है। इन आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।