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केजरीवाल को राहत! हाई कोर्ट ने AAP का पंजीकरण रद्द करने की मांग ठुकराई

 

New Delhi : दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया। इस याचिका में आम आदमी पार्टी के नेताओं—अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक—को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने और पार्टी का पंजीकरण रद्द करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि याचिका में लगाए गए आरोपों का कोई कानूनी आधार नहीं है और इस मामले में कोई भी आदेश जारी करना उचित नहीं है।

यह सुनवाई दिल्ली उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस देवेन्द्र उपाध्याय की बेंच ने की। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या कानून में किसी राजनीतिक दल का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का स्पष्ट प्रावधान मौजूद है। कोर्ट ने कहा कि केवल आरोप लगाने से किसी पार्टी को डि-रजिस्टर नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि केजरीवाल और अन्य नेताओं ने अदालत की कार्यवाही को बदनाम करने की कोशिश की है। इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या केवल ऐसे आरोपों के आधार पर चुनाव आयोग को किसी पार्टी का पंजीकरण रद्द करने का आदेश दिया जा सकता है।

वकील ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29A(5) और सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि कोई राजनीतिक दल संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई संभव है। हालांकि अदालत ने कहा कि पहले यह साबित करना जरूरी है कि कानून चुनाव आयोग को ऐसी परिस्थिति में पार्टी का पंजीकरण रद्द करने का अधिकार देता है या नहीं।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी नेता ने अदालत के खिलाफ बयान दिया है, तो उसके लिए अलग कानूनी प्रक्रिया मौजूद है, जैसे अवमानना की कार्रवाई। लेकिन केवल इस आधार पर किसी राजनीतिक दल को समाप्त करना या नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकना उचित नहीं होगा।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राजनीतिक दलों के रजिस्ट्रेशन और उसे रद्द करने की पूरी प्रक्रिया कानून में स्पष्ट रूप से तय है और याचिका उसी कानूनी व्यवस्था को सही ढंग से समझे बिना दाखिल की गई है।