TMC में बगावत? ममता की करीबी सांसद बोलीं- अब पद पर बने रहने का मतलब नहीं
Kolkata : काकोली घोष दस्तीदार ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस के भीतर अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। ऑल इंडिया तृणमूल महिला कांग्रेस विंग की अध्यक्ष और लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी की आंतरिक कार्यप्रणाली और नेतृत्व से असंतोष जताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबा पत्र साझा किया।
अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा कि महिला सांसदों के साथ कथित अनुचित व्यवहार को रोकने में वह असफल रहीं और उन्हें पार्टी नेतृत्व से अपेक्षित सहयोग तथा सहानुभूति नहीं मिली। उन्होंने कहा, “ऐसी स्थिति में अब पद पर बने रहने का कोई मतलब नहीं रह गया है।”
भ्रष्टाचार और RG Kar मामले का भी किया जिक्र
काकोली घोष दस्तीदार ने अपने पत्र में पश्चिम बंगाल और पार्टी से जुड़े कई विवादित मामलों पर चिंता जताई। उन्होंने राशन वितरण घोटाले, शिक्षक भर्ती भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों से जनता के बीच अविश्वास बढ़ा है।
उन्होंने RG Kar Medical College and Hospital में महिला डॉक्टर की संदिग्ध मौत और कथित सबूतों से छेड़छाड़ के आरोपों का भी जिक्र किया। सांसद ने कहा कि इन घटनाओं ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से गहराई से विचलित किया है।
IPAC और ‘अलोकतांत्रिक प्रभाव’ पर सवाल
टीएमसी सांसद ने पत्र में IPAC से जुड़े आरोपों और पार्टी पर कथित बाहरी प्रभावों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यदि लोकतांत्रिक राजनीतिक संस्कृति की जगह अपारदर्शी और अलोकतांत्रिक प्रभाव हावी होने लगें, तो यह पार्टी की परंपराओं और आदर्शों के लिए नुकसानदायक है।
‘पार्टी नहीं छोड़ रही हूं’
काकोली घोष दस्तीदार ने साफ किया कि उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि वह तृणमूल कांग्रेस की एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में जनता और बंगाल के हित में काम करती रहेंगी।
उन्होंने लिखा कि यह फैसला किसी निजी शिकायत या कटुता से प्रेरित नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और सार्वजनिक जीवन के प्रति नैतिक जिम्मेदारी के तहत लिया गया है।
शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद बढ़ी अटकलें
काकोली घोष दस्तीदार का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब उन्होंने हाल ही में पश्चिम बंगाल में हुई एक प्रशासनिक बैठक में हिस्सा लिया था, जिसकी अध्यक्षता शुभेंदु अधिकारी ने की थी। इसके बाद उनके इस्तीफे को लेकर राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, क्योंकि काकोली घोष दस्तीदार को लंबे समय से ममता बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है।